जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी का एक बयान एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, ‘भोपाल जिहाद’ जैसे शब्दों पर उठ रहे सवालों पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि जिहाद, इस्लाम और मुसलमानों से जुड़े पवित्र विचारों को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर हिंसा और गड़बड़ी से जोड़ा गया है। उनका यह बयान जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी की बैठक के दौरान सामने आया, जहां उन्होंने इसके लिए जिहाद, मुसलमान और इस्लाम के “दुश्मनों” को जिम्मेदार ठहराया।
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर मुसलमानों को आहत किया जाता है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, एजुकेशन जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्द उनके धर्म का अपमान करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान और सरकार में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
#WATCH | Bhopal, MP: Jamiat Ulama-i-Hind president, Maulana Mahmood Madani says, "Enemies of Islam and Muslims have made 'jihad' a synonym of abuse, conflict and violence. Terms like Love jihad, Land jihad, 'Taleem' Jihad, 'Thook' Jihad are used to insult the faith of Muslims. It… pic.twitter.com/NKNOO74WZ6
— ANI (@ANI) November 29, 2025
“जुल्म होगा तो जिहाद होगा”
मीटिंग के दौरान मदनी ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब भी मुसलमानों पर जुल्म होगा, जिहाद होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि मॉब लिंचिंग, बुलडोज़र एक्शन, वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जे और मदरसों के खिलाफ नकारात्मक अभियान जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर बयान
मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में आए कुछ निर्णय जैसे बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक—के कारण यह धारणा बन रही है कि अदालत सरकारी दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट तभी सर्वोच्च कहलाने का हकदार है, जब तक वह संविधान का सम्मान करे और कानून के सिद्धांतों का पालन करे। यदि ऐसा न हो तो उसकी नैतिक सर्वोच्चता संदिग्ध हो जाती है।
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