भारत अब दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले देशों में से एक बन गया है। देश का कुल सड़क नेटवर्क अब 63 लाख किलोमीटर से अधिक लंबा है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 1,46,342 किलोमीटर तक पहुंच गई है। यह मार्च 2014 के आंकड़ों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत ज्यादा है। दस साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग केवल 91,287 किलोमीटर लंबा था, यानी इस दशक में करीब 55,000 किलोमीटर नए राजमार्ग बने हैं।
एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर का उभार
सिर्फ सामान्य सड़कों ही नहीं, बल्कि हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। साल 2014 में देश में केवल 93 किलोमीटर एक्सप्रेसवे थे, जो 2025 तक बढ़कर 5,110 किलोमीटर हो गए हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, और दिल्ली-लखनऊ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट इस प्रगति के उदाहरण हैं। इन हाई-स्पीड मार्गों की वजह से यात्रा का समय कम हुआ है और लॉजिस्टिक्स, व्यापार और उद्योग को नई गति मिली है। भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में 10,000 किलोमीटर से ज्यादा एक्सप्रेसवे तैयार करना है।
महाराष्ट्र बना नेशनल हाईवे का किंग
राज्यों के हिसाब से देखें तो महाराष्ट्र राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में सबसे आगे है। यहां अब 18,462 किमी लंबा राजमार्ग है, जो 2014 में 6,249 किमी था, यानी पिछले 11 साल में लगभग 12,213 किमी का इजाफा हुआ है।
इसके बाद उत्तर प्रदेश (12,123 किमी) और राजस्थान (10,733 किमी) का नंबर आता है। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार और ओडिशा ने भी इस मामले में अच्छी प्रगति दिखाई है। इन राज्यों में सड़कें सिर्फ यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि रोजगार, पर्यटन, व्यापार और ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी हैं। सड़क नेटवर्क के विस्तार से देश में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई ताकत मिली है।
विकास की रफ्तार के साथ बढ़ती संभावनाएं
भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क सिर्फ शहरों और राज्यों के बीच दूरी कम नहीं कर रहा, बल्कि यह देश की आर्थिक गतिविधियों की धड़कन भी बन गया है। बेहतर सड़कों की वजह से कृषि उत्पाद जल्दी बाजार तक पहुंच रहे हैं, उद्योगों को नए अवसर मिले हैं और पर्यटक स्थलों की पहुंच भी आसान हुई है। अब सरकार का ध्यान स्मार्ट रोड टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी आधारित हाइवे और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, ताकि सड़कें तेज़ होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों।
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