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यहां नहीं है पैसो की कोई वैल्यू, सड़कों पर यूं ही पड़े रहते है नोट; कचरा समझ नहीं उठता कोई

एक समय लैटिन अमेरिका का सबसे अमीर देश वेनेज़ुएला आज हाइपरइन्फ्लेशन और आर्थिक संकट में है। यहां अब पैसों की कोई वैल्यू नहीं है इसीलिए लोग कचरे की तरह नोट फेकते नजर आते है।

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वेनेज़ुएला एक समय में अपनी तेल संपदा के दम पर दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाता था। 2000 के दशक में तेल निर्यात ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और सामाजिक कल्याण योजनाओं ने आम लोगों की जिंदगी आसान बनाई। लेकिन अब वही तेल इसके आर्थिक संकट की वजह बन गया है। 2016 में तेल की वैश्विक कीमतों में गिरावट और सरकार की अव्यवस्थित नीतियों ने आर्थिक ढांचे को झकझोर दिया। राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ने बड़ी मात्रा में मुद्रा छापना शुरू कर दी, जिससे हाइपरइन्फ्लेशन बढ़ गया। 2025 तक यह संकट चरम पर पहुंच गया है, और अब लोग अपनी ही नोटों को बेकार समझकर सड़कों पर फेंकने लगे हैं।

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2025 में संकट की नई गहराई

इस साल महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 2025 के अंत तक मुद्रास्फीति 400% से ऊपर पहुंच सकती है। आम लोगों के लिए रोजमर्रा की चीजें अब महंगी हो गई हैं, एक किलो मांस की कीमत कुछ महीनों में 4 डॉलर से बढ़कर 8 डॉलर हो गई है। तेल उत्पादन भी तेजी से गिरा है; अप्रैल में यह 8.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मार्च में 9.8 लाख था। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कई विदेशी कंपनियों ने काम बंद कर दिया, जिससे निर्यात और डॉलर की आमद दोनों घट गई। विदेशी मुद्रा की कमी ने सरकार को और नोट छापने पर मजबूर किया, जिससे महंगाई और बढ़ गई।

आम लोगों की टूटी कमर

हाइपरइन्फ्लेशन ने वेनेज़ुएला के आम नागरिकों की हालत बिगाड़ दी है। शिक्षक और सरकारी कर्मचारी अब इतनी कम सैलरी में जी रहे हैं कि महीने का आधा खर्च भी पूरा नहीं कर पाते। लोग डॉलर में कमाई और लेन-देन करने को मजबूर हैं, लेकिन कैश डॉलर की भारी कमी है। दुकानदार और व्यापारी समानांतर बाजार की दरों के हिसाब से कीमतें तय कर रहे हैं, जिससे बाजार में अफरा-तफरी है। डिजिटल लेन-देन बढ़ा है, लेकिन इंटरनेट अस्थिरता और बिजली कटौती इसे मुश्किल बना रही है। खाने-पीने और दवाइयों जैसी बुनियादी चीजें महँगी और दुर्लभ हो गई हैं। अस्पतालों में स्टाफ और उपकरणों की कमी ने स्वास्थ्य संकट को और गहरा दिया है।

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सरकार की चुप्पी और भविष्य की चुनौती

सरकार ने अब आधिकारिक महंगाई के आंकड़े जारी करना बंद कर दिए हैं। स्वतंत्र विश्लेषकों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म संचालकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने न आए। सरकार दावा कर रही है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जीडीपी वृद्धि 2% से भी कम रहने की संभावना है, जबकि बेरोज़गारी और गरीबी चरम पर हैं। वेनेज़ुएला के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकाल सके और जनता का विश्वास दोबारा जीत सके। जब तक नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आएगी, तब तक हाइपरइन्फ्लेशन के जाल से बाहर निकलना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगा।

Keywords: Venezuela Economy, Hyperinflation 2025, Bolivar Collapse, Oil Production Decline, US Sanctions, Economic Crisis

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