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यहां छिपकलियां बना रही हैं लोगों को मालामाल, तिजोरियों में खुद ब खुद भर रहा है पैसा

एक अजीबोगरीब जगह जहां छिपकलियों को माना जा रहा है धन की देवी! लोग हो रहे हैं रातोंरात अमीर, और तिजोरियां खुद-ब-खुद पैसों से भर रही हैं। जानिए क्या है इस रहस्य के पीछे का कारण।

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चीन की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इन दिनों एक अनोखा बदलाव हो रहा है। पहले जहां किसान धान, गेहूं या मुर्गियां पालकर अपना गुज़ारा करते थे, अब वे छिपकलियां पालकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। दक्षिणी चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक छोटे से गांव में रहने वाले किसान ली वेई ने इस बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने 2020 में मुर्गी पालन छोड़ दिया और टोकेय गेको (Tokay Gecko) नाम की छिपकली की फार्मिंग शुरू की। कुछ ही सालों में उनका कारोबार इतना बढ़ा कि अब वे हर साल करीब 67 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। ली वेई की इस सफलता ने हजारों ग्रामीणों को प्रेरित किया है। अब कई लोग छिपकली पालन को “हरित सोना” कहकर इसकी खेती शुरू कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। यह बदलाव चीन के गांवों की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है।

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सोना उगलने वाली छिपकलियां

टोकेय गेको दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ और सुंदर छिपकली है। इसका शरीर नीला-भूरा होता है, जिस पर चमकीले नारंगी रंग के धब्बे होते हैं। चीन में यह प्रजाति अब विलुप्ति के कगार पर है, लेकिन इसकी नियंत्रित फार्मिंग ने जंगली शिकार पर काफी हद तक रोक लगा दी है। एक वयस्क टोकेय गेको की कीमत 500 से 1000 डॉलर तक होती है, जिससे यह दुनिया की सबसे महंगी छिपकलियों में गिनी जाती है। पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) में इसे “शियाओके” कहा जाता है और माना जाता है कि यह छिपकली फेफड़ों और किडनी की बीमारियों के इलाज में मददगार होती है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि बिना वैज्ञानिक प्रमाण के ऐसे पारंपरिक उत्पादों का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके बावजूद टोकेय गेको की मांग लगातार बढ़ रही है।

कैसे होती है छिपकली की खेती

ली वेई के फार्म में आज 5 लाख से ज्यादा टोकेय गेको मौजूद हैं। फार्म में तापमान को 28 से 32 डिग्री सेल्सियस और नमी को 70–80% तक बनाए रखा जाता है, ताकि इन छिपकलियों को उनके प्राकृतिक जैसे हालात मिल सकें। इन्हें कीड़े-मकोड़े, फल और सब्जियों का संतुलित आहार दिया जाता है। ब्रिडिंग सीजन में एक मादा गेको 20 से 30 अंडे देती है, जो लगभग 60 दिनों में फूटते हैं। ली का फार्म हर साल करीब 10 लाख गेको यूनिट्स तैयार करता है। ली वेई कहते हैं, “यह बिजनेस आसान नहीं है, लेकिन अगर मेहनत की जाए तो मुनाफा बहुत बड़ा हो सकता है।” उनके फार्म पर काम कर रहे ग्रामीणों की आमदनी अब दोगुनी हो चुकी है। इससे गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है और लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। टोकेय गेको फार्मिंग अब गांव के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन चुकी है।

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सरकार का समर्थन और वैश्विक बहस

चीनी सरकार ने टोकेय गेको की फार्मिंग को “ग्रीन फार्मिंग इनिशिएटिव 2024” का हिस्सा बनाकर इसे आधिकारिक समर्थन दे दिया है। इसके तहत किसानों को सब्सिडी, ट्रेनिंग और जरूरी संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं, ताकि वे इस व्यवसाय को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से आगे बढ़ा सकें। सिर्फ गुआंगडोंग प्रांत में ही 200 से ज्यादा गेको फार्म सक्रिय हैं, जो मिलकर करीब 500 करोड़ डॉलर का कारोबार कर रहे हैं। हालांकि पश्चिमी देशों में इसे “अंधविश्वास पर आधारित उद्योग” बताया जा रहा है, क्योंकि इसका मुख्य उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा में है, जिसका वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है। बावजूद इसके, चीन में गेको फार्मिंग को ग्रामीण आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक माना जा रहा है। भले ही इस पर बहस जारी हो, लेकिन एक बात तय है, चीन के गांवों में अब छिपकलियों की खेती से एक नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।

Keywords: Tokay Gecko Farming, China Rural Economy, Green Farming Initiative, Lizard Farming

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