इन दिनों सोशल मीडिया पर ईरान के वैज्ञानिक अलाअद्दीन कासेमी का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे एक सामान्य कार में बगीचे की पाइप से पानी भरते दिखते हैं। उनका दावा है कि यह कार पेट्रोल या डीज़ल से नहीं, बल्कि केवल पानी से चलती है। कासेमी के अनुसार, उनकी तकनीक पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदल देती है। इस प्रक्रिया से जो ऊर्जा बनती है, उससे कार का इंजन चलता है। इस कार की खास बात यह है कि इसमें किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता, सिर्फ पानी की भाप निकलती है। उनका कहना है कि अगर कार में 60 लीटर पानी डाला जाए, तो यह 900 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकती है। यह अनोखा आविष्कार लोगों को हैरान कर रहा है और इसे भविष्य की एक बड़ी तकनीकी सफलता माना जा रहा है।
वैज्ञानिक प्रक्रिया या असंभव खोज?
हालांकि अलाअद्दीन कासेमी का यह दावा सुनने में बहुत दिलचस्प है, लेकिन यह विज्ञान के नियमों से मेल नहीं खाता। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने के लिए पहले से ऊर्जा लगती है। यह ऊर्जा कहीं न कहीं से देनी ही पड़ती है। अगर कोई कार अपने अंदर ही पानी से हाइड्रोजन बनाकर खुद को चला रही है, तो यह थर्मोडायनामिक्स यानी ऊर्जा के नियमों के खिलाफ है। विज्ञान के अनुसार, बिना बाहर से अतिरिक्त ऊर्जा दिए ऐसा करना संभव नहीं है। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दावा भले ही नया और उत्साहित करने वाला लगे, लेकिन तकनीकी रूप से यह मुमकिन नहीं लगता। इसलिए जब तक इस तकनीक के पीछे के वैज्ञानिक तथ्य और सबूत साफ नहीं होते, इसे सच मानना मुश्किल है। फिर भी यह दावा चर्चा में बना हुआ है।
An Iranian scientist claims he's built a car that runs on nothing but water. The inventor says the vehicle uses a process to split water into hydrogen and oxygen, then burns the hydrogen to power the engine allegedly traveling 900 km on 60 liters! God save his life 👍🏻 pic.twitter.com/7Am2x716Gi
— Rattan Dhillon (@ShivrattanDhil1) October 19, 2025
जनता की जिज्ञासा और डर दोनों
इस वायरल वीडियो ने लोगों के बीच उत्साह और हैरानी तो फैलाई ही है, लेकिन साथ ही कुछ लोग वैज्ञानिक अलाअद्दीन कासेमी की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट करते हुए उनकी सलामती की दुआ की है। एक यूजर ने लिखा, “ईश्वर इनकी रक्षा करे,” जबकि दूसरे ने कहा, “इस शख्स को गायब कर दिया जाएगा।” दरअसल, लोगों की चिंता का कारण यह है कि इतिहास में कई बार ऐसे आविष्कारों को दबा दिया गया है, जो बड़ी तेल कंपनियों या सरकारों के लिए खतरा बन सकते थे। जब भी कोई नई तकनीक पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को चुनौती देती है, उस पर संदेह और विवाद खड़े हो जाते हैं। यही वजह है कि लोग इस वीडियो को सिर्फ एक तकनीकी खोज नहीं, बल्कि एक संभावित साजिश या बड़े खेल का हिस्सा मानकर भी देख रहे हैं।
पानी से ऊर्जा का सपना, या सिर्फ एक मिथ?
वैसे, यह पहली बार नहीं है जब किसी ने पानी से वाहन चलाने का दावा किया हो। भारत में भी कुछ साल पहले एक भारतीय हैकर ने यूट्यूब पर ऐसा ही वीडियो डाला था, जिसमें उसने पानी को बाइक के फ्यूल टैंक में डालकर इंजन स्टार्ट करते हुए दिखाया था। हालांकि उस तकनीक का न तो कोई वैज्ञानिक प्रमाण मिला और न ही कोई काम करने वाला मॉडल सामने आया। यही हाल ईरान के वैज्ञानिक कासेमी की “वाटर-पावर्ड कार” का भी है।
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि यह खोज सचमुच ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति लाने वाली तकनीक है या फिर केवल प्रचार और ध्यान खींचने का तरीका। लेकिन एक बात तय है, इस वायरल दावे ने फिर से इंसान के उस पुराने सपने को ज़िंदा कर दिया है: “पानी से चलने वाली कार”। एक ऐसी तकनीक जो पर्यावरण को बचा सके और भविष्य की ऊर्जा समस्याओं का समाधान बन सके।
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