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पतली छड़ी से साली की पिटाई, जीजा की सख्ती देख दंग रह जाएंगे आप….जानें इस अनोखी परंपरा का पूरा सच!

दुनिया की कई जनजातियों के अनोखे रीति-रिवाज होते हैं। इथोपिया की एक जनजाति की शादी के खास रिवाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो देखने में बेहद अनोखे और खास हैं।

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दुनिया में कई जनजातियां हैं जिनके रीति-रिवाज आम लोगों को हैरान कर सकते हैं, लेकिन उनके लिए ये बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसी ही एक जनजाति है इथोपिया की हमार (Hamar) ट्राइब, जो Omo Valley में रहती है। इस जनजाति में करीब 50,000 लोग रहते हैं और ये मुख्य रूप से पशुपालक हैं। उनके लिए गाय केवल जानवर नहीं, बल्कि धन और इज्जत का निशान होती हैं। हमार लोग अपनी गायों की संख्या से पहचाने जाते हैं। उनकी संस्कृति रंग-बिरंगी है, जिसमें शरीर पेंटिंग, खास गहने और नृत्य शामिल हैं। सबसे खास उनकी शादी की रस्में हैं, जो तीन से चार दिन तक चलती हैं। ये रस्में एक युवा लड़के के लिए ‘मर्द’ साबित होने का मौका होती हैं और यह उनकी परंपराओं का अहम हिस्सा हैं।

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शादी की कीमत: दुल्हन के बदले गायें

हमार जनजाति में शादी करना आसान काम नहीं होता। यहां दूल्हे को दुल्हन के परिवार को ब्राइड प्राइस यानी वधू दहेज देना पड़ता है, जो मुख्य रूप से गायों के रूप में होता है। आमतौर पर एक शादी के लिए 30 से 40 गायें दी जाती हैं, लेकिन कभी-कभी यह संख्या 100 तक भी पहुंच जाती है। यह सब दूल्हे और दुल्हन के परिवार की सामाजिक स्थिति पर निर्भर करता है। गायें दुल्हन के परिवार की आर्थिक सुरक्षा का जरिया होती हैं। अगर दूल्हे के पास पर्याप्त गायें नहीं होतीं, तो शादी करना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह परंपरा केवल आर्थिक वजह से ही नहीं, बल्कि हमार जनजाति की सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

आज के समय में जहां शहरों में लोग पैसे या संपत्ति के रूप में दहेज लेते हैं, वहीं हमार जनजाति में गायें ही सम्मान और वैभव का प्रतीक मानी जाती हैं। यह रीति-रिवाज उनकी पहचान और संस्कृति का अहम हिस्सा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं। गायों के बिना शादी अधूरी मानी जाती है और इसका महत्व जनजाति के जीवन में बहुत बड़ा है।

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लाल मिट्टी और घी से सजी दुल्हन

हमार ट्राइब की दुल्हनें किसी कलाकार की पेंटिंग जैसी खूबसूरत दिखती हैं। शादी के दिन उन्हें लाल मिट्टी (red ochre) और घी (butter) से सजाया जाता है। यह परंपरा सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि इसकी गहरी मान्यता भी है। यह मिश्रण सूरज की तेज किरणों से त्वचा की रक्षा करता है और उपजाऊपन (fertility) का भी प्रतीक माना जाता है। शादी के मौके पर महिलाएं घुंघरू जैसे गहने, मोतियों की माला और जानवरों की खाल से बने पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं। उनका यह लुक न सिर्फ आकर्षक होता है, बल्कि उनकी सामाजिक पहचान और गर्व को भी दर्शाता है। आज दुनिया उनकी तस्वीरों को “वायरल मोमेंट” के रूप में देखती है, लेकिन हमार ट्राइब के लिए यह उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे वे बड़ी श्रद्धा से निभाते हैं। यह परंपरा उनकी पहचान और जीवनशैली का अहम हिस्सा है।

मर्दानगी का टेस्ट और ‘सालियों की सुटाई’

हमार जनजाति की शादी का सबसे रोमांचक और चौंकाने वाला हिस्सा है ‘Bull Jumping Ceremony’। इसमें दूल्हे को बिना गिरे 10 से 15 बैलों के ऊपर लगातार कूदना होता है। इस चुनौती को पूरा करने वाला युवक ‘Maza’ यानी योद्धा कहलाता है, तभी उसे शादी करने का अधिकार मिलता है। यह रस्म मर्दानगी और साहस की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। शादी के अंत में एक और अनोखी रस्म होती है, ‘सालियों की सुटाई’। इस परंपरा में दूल्हा खुद अपनी सालियों को कोड़ों से मारता है, और वे बिना दर्द दिखाए इसे सहती हैं। बाहरी लोगों को यह कठोर लगता है, लेकिन हमार संस्कृति में इसे सम्मान और ताकत का प्रतीक माना जाता है। जितने निशान शरीर पर हों, उतनी ही महिला मजबूत और गर्वित मानी जाती है।

Keywords: Hamar Tribe, Tribal Wedding Rituals, African Tribes

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