मशहूर विज्ञापन गुरु पीयूष पांडेय अब हमारे बीच नहीं रहे। वह भारत के विज्ञापन जगत का एक बहुत बड़ा नाम थे। उन्होंने अपनी सरल सोच और आसान भाषा से विज्ञापन की दुनिया को एक नई दिशा दी। पीयूष पांडेय के कई विज्ञापन अभियान इतने सफल हुए कि वे लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए। ब्रांड्स की पहचान हर घर तक पहुँचाने में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा। उनकी शानदार मूंछें और हमेशा हँसते रहने वाला चेहरा विज्ञापन इंडस्ट्री में उनकी अलग पहचान थी। उनके जाने से विज्ञापन की दुनिया का एक बड़ा दौर खत्म हो गया है, जिसे उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा से सजाया था।
‘कुछ ख़ास है’ से लेकर ‘हर खुशी में रंग लाए’
पीयूष पांडेय ने बहुत सारे यादगार और दिल को छूने वाले नारे और स्लोगन लिखे, जो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। उन्होंने एशियन पेंट्स के लिए बहुत ही सरल और प्रभावी नारा बनाया था, जो था ‘हर खुशी में रंग लाए’। इसी तरह, कैडबरी चॉकलेट का मशहूर विज्ञापन नारा ‘कुछ खास है’ भी उन्हीं की कलम से निकला था। ये नारे केवल प्रोडक्ट का प्रचार नहीं थे, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ने का एक सीधा तरीका थे। इसके अलावा, उन्होंने फेविकोल और हच जैसी कई बड़ी कंपनियों के लिए भी कामयाब विज्ञापन अभियान चलाए, जिन्होंने उन ब्रांड्स को बहुत ऊँचाई तक पहुँचाया। उन्होंने सिर्फ़ ब्रांड्स के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी एक बहुत चर्चित नारा दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल हुआ नारा ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ भी पीयूष पांडेय ने ही तैयार किया था, जो देश भर में बहुत मशहूर हुआ था।
पीयूष पांडेय का एक और बड़ा योगदान
पीयूष पांडेय की एक और बड़ी देन है, वह गीत जिसने देश की एकता और विविधता को दिखाया। उन्होंने ही ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गीत लिखा था, जो कई सालों तक दूरदर्शन चैनल का मुख्य गीत बना रहा। यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग इससे जुड़ाव महसूस करते थे। वह करीब चालीस सालों तक एक बहुत बड़ी विज्ञापन कंपनी ओगिल्वी इंडिया के साथ जुड़े रहे। उनकी इस कंपनी में मौजूदगी को भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव माना जाता है। उन्होंने भारतीय समाज की बोली, संस्कृति और परंपराओं को बहुत गहराई से समझा। इसी समझ के कारण उनके बनाए विज्ञापन लोगों के दिलों को छू जाते थे और वे पूरी दिलचस्पी से इन्हें देखते थे।
विज्ञापन जगत का तरीका बदला
पीयूष पांडेय ने 1982 में ओगिल्वी इंडिया को जॉइन किया था। इससे पहले वह एक क्रिकेटर थे और चाय बागान के साथ-साथ निर्माण क्षेत्र में भी काम कर चुके थे। उन्होंने उस समय विज्ञापन जगत में कदम रखा जब ज़्यादातर काम अंग्रेजी में होता था, लेकिन उन्होंने सरल हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल करके इस इंडस्ट्री का पूरा तरीका ही बदल दिया। इस वजह से विज्ञापन आम लोगों के और करीब आ गए। उनकी सोच ने यह साबित किया कि विज्ञापन को सफल बनाने के लिए बड़ी-बड़ी बातों की नहीं, बल्कि सरल और आम आदमी से जुड़ी बातों की ज़रूरत होती है।
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