उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में से दो धाम, केदारनाथ और यमुनोत्री, के कपाट दिवाली के ठीक बाद भैया दूज के पावन मौके पर अब छह महीने के लिए बंद हो गए हैं। कड़ाके की ठंड और बहुत ज्यादा बर्फबारी के कारण यह हर साल की परंपरा है कि भक्तों के लिए इन मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। अब इन दोनों पवित्र मंदिरों के भगवान की पूजा और दर्शन उनके शीतकालीन निवास स्थानों पर किए जाएंगे।
केदारनाथ में समाधि पूजा के बाद डोली हुई रवाना
रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद केदारनाथ धाम के कपाट गुरुवार को सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर विधि विधान के साथ बंद कर दिए गए। इस मौके पर मंदिर को बहुत सुंदर फूलों से सजाया गया था। कपाट बंद करने से पहले भगवान शिव की खास समाधि पूजा की गई। इस पूजा के दौरान बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को भस्म, रुद्राक्ष, सफेद कपड़ा और अनाज जैसी चीजों से ढक दिया गया। इसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया।
कपाट बंद होने के तुरंत बाद, बाबा केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली, जिसे उनकी मूर्ति माना जाता है, अब शीतकालीन प्रवास यानी ऊखीमठ के लिए रवाना हो गई है। डोली पहले पड़ाव के लिए रामपुर में विश्राम करेगी। फिर 25 अक्टूबर को बाबा केदार की पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी। यहीं पर अगले छह महीने तक भक्त बाबा केदार के दर्शन और पूजा कर सकेंगे।
यमुनोत्री धाम के कपाट बंद और माँ यमुना का खरसाली निवास
उत्तरकाशी जिले में मौजूद यमुनोत्री धाम के कपाट भी भैया दूज के मौके पर गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर बंद हो गए हैं। कपाट बंद होने से पहले मंदिर को लगभग 11 क्विंटल फूलों से बहुत ही शानदार तरीके से सजाया गया था।
कपाट बंद होने के बाद, माँ यमुना की भोग मूर्ति भी अगले छह महीने के लिए शीतकालीन निवास खरसाली गांव में मौजूद यमुना मंदिर में रहेंगी। यह भी एक पुरानी परंपरा है। माँ यमुना को लेने के लिए उनके भाई सोमेश्वर महाराज यानी शनिदेव महाराज की डोली सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर खरसाली गाँव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। अब शीतकाल के दौरान माँ यमुना के दर्शन और पूजा खरसाली स्थित यमुना मंदिर में की जाएगी। इस तरह, भक्तों को छह महीने तक बाबा केदार और माँ यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन निवास पर मिलते रहेंगे।
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