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ट्रंप ने क्यों अचानक चीन पर नरमी और रूस पर सख्ती दिखाई, क्या है इस बड़े बदलाव की वजह?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए चीन से बातचीत का रास्ता खोला है, जबकि रूस पर सख्त रुख अपनाया है; साथ ही भारत की तेल आयात नीति पर भी बात की है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाल के बयानों ने दुनिया भर की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने चीन और रूस को लेकर अपनी विदेश नीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। एक तरफ जहाँ उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से जल्दी मिलने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ अपनी तय मीटिंग को रद्द करके उस पर सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं।

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चीन के साथ बातचीत की तैयारी

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ युद्ध के बीच ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वह अगले हफ्ते दक्षिण कोरिया में जिनपिंग से मिलेंगे। ट्रंप का मानना है कि इस लंबी बातचीत में दोनों देश मिलकर कई बड़े सवालों और शंकाओं को सुलझा सकते हैं। इस बयान से पहले, चीन ने कहा था कि वह कोई लड़ाई नहीं चाहता, लेकिन अगर मजबूर किया गया तो करारा जवाब देगा, और सहयोग से ही दोनों देशों का फायदा होगा। यह दिखाता है कि दोनों बड़ी ताकतें व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

रूस पर कड़े प्रतिबंध और पुतिन से दूरी

चीन से नरमी दिखाते हुए ट्रंप ने रूस पर सख़्ती का रुख अपनाया है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली अपनी मीटिंग को रद्द करने की बात बताई। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगा कि वे दोनों उस मुकाम तक पहुँच पाएँगे, इसीलिए उन्होंने मीटिंग रद्द कर दी। इसके साथ ही, ट्रंप ने रूस के खिलाफ बहुत बड़े और कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये पाबंदियाँ रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाई गई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध सुलझ जाएगा।

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रूस-चीन दोस्ती पर ट्रंप का विचार

ट्रंप ने रूस और चीन की बढ़ती नजदीकी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चीन और रूस के रिश्ते दोस्ताना नहीं हो सकते। उनका मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन और ओबामा की नीतियों ने ऊर्जा और तेल के कारण इन दोनों देशों को एक साथ आने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि वह जिनपिंग से असल में इस बारे में बात करेंगे कि रूस और यूक्रेन के साथ युद्ध को कैसे खत्म किया जाए, चाहे वह तेल, ऊर्जा या किसी और चीज के जरिए हो।

भारत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ

डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरान भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कल भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात की और वह बिल्कुल अच्छे रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों को सुलझाया है, जिनमें से पाँच-छह टैरिफ की वजह से सुलझे हैं। भारत और पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें बहुत ज्यादा टैरिफ चुकाना होगा। उन्होंने बताया कि वह एक व्यापार समझौते के बीच में हैं और दोनों देशों ने फोन करके कहा कि वे अब और नहीं लड़ेंगे।

तेल आयात पर भारत का बड़ा कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी आने वाली बैठक के बारे में बात करते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें बताया है कि वे रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह एक क्रमिक प्रक्रिया है और वे इसे एकदम से बंद नहीं कर सकते। उन्होंने दावा किया कि साल के अंत तक, भारत के पास रूस से तेल खरीदना लगभग शून्य रह जाएगा, जबकि इस समय यह लगभग चालीस प्रतिशत तेल है। उन्होंने फिर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बिल्कुल अच्छे रहे हैं।

टैरिफ से देश को हो रहा फायदा

आयात शुल्क यानी टैरिफ के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक देश के तौर पर इस समय टैरिफ की वजह से बहुत अच्छा कर रहा है। उन्होंने कहा कि टैरिफ के बिना, अमेरिका उतना पैसा नहीं ले पाता जितना वह अब ले रहा है। उन्होंने टैरिफ को देश के लिए बेहद जरूरी बताया, और कहा कि कई दशकों से उनके खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया जा रहा था, इसीलिए उन पर भारी कर्ज है।

Keywords: India Russia Oil Imports, US China Trade War, Trump PM Modi Talks

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