स्कॉटलैंड के 68 वर्षीय जेरार्ड मैकएलिस की ज़िंदगी उस वक्त बदल गई, जब उनकी नाक ने अचानक अजीब रूप लेना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी नाक पर सूजन आने लगी और त्वचा मोटी होने लगी। कुछ समय तक उन्होंने इसे सामान्य एलर्जी या स्किन इंफेक्शन समझकर नज़रअंदाज़ किया, मगर हालात धीरे-धीरे बिगड़ते चले गए। नाक का आकार इतना बढ़ गया कि वह झूलने लगी और उनके मुंह के ऊपर तक आने लगी। लोगों की नजरें उन पर ठहर जाती थीं, कुछ डरकर दूर हट जाते। जेरार्ड बताते हैं, “मैं जब बाहर जाता, तो लोगों की निगाहें मेरी नाक पर टिक जातीं। बच्चों के सवाल सबसे कठिन होते, वे मासूम हैं, लेकिन उनके शब्द भीतर तक चोट पहुंचाते हैं।
जब आत्मविश्वास हुआ गायब
एक वक्त ऐसा आया जब जेरार्ड को लोगों से मिलना-जुलना ही भारी लगने लगा। 30 साल तक IBM में काम करने वाले यह शख्स अब भीड़ में खुद को छुपाने लगे। उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे खत्म हो रहा था। वे बताते हैं, “मैं अपने पोते के जन्मदिन पर जाता, लेकिन हमेशा सोचता कि उसके दोस्त क्या कहेंगे? क्या यह तुम्हारे दादा हैं?” नाक का बढ़ना सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक बोझ भी बन गया था। डॉक्टरों ने पहले उन्हें सर्जरी की जरूरत नहीं बताई, क्योंकि सांस लेने में कोई परेशानी नहीं थी। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ी, जेरार्ड की मुस्कान गायब होती चली गई। आखिरकार उन्होंने तय किया कि अब वे इलाज करवाएंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।
एक अनोखी लेकिन जटिल बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक, जेरार्ड को ‘राइनोफाइमा’ (Rhinophyma) नामक दुर्लभ त्वचा संबंधी रोग था। इस स्थिति में नाक के नीचे स्थित सेबेशियस ग्रंथियां (Sebaceous Glands) असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं, जिससे नाक लाल, सूजी और मांसल हो जाती है। यह बीमारी आमतौर पर रोजेशिया (Rosacea) नामक त्वचा रोग के बढ़े हुए रूप में देखी जाती है। हालांकि, इसका कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि आनुवांशिक कारक, हार्मोनल असंतुलन और शराब का अत्यधिक सेवन इसे बढ़ा सकते हैं। दुनिया भर में यह बीमारी बहुत कम लोगों को होती है, लेकिन इसका मानसिक प्रभाव बेहद गहरा होता है।
सर्जरी ने बदल दी जिंदगी
जब जेरार्ड ने सर्जरी करवाई, तो न सिर्फ उनका चेहरा बल्कि उनकी ज़िंदगी भी बदल गई। निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक अतिरिक्त ऊतक (tissue) को हटाया और नाक को नया आकार दिया। कुछ हफ्तों के इलाज के बाद वे फिर से आत्मविश्वास से मुस्कुराने लगे। वे कहते हैं, “अब मैं फिर से आईने में खुद को देख पाता हूं, और अपने पोतों को बिना झिझक किस कर सकता हूं।” जेरार्ड की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे समस्या कितनी भी विचित्र क्यों न हो, अगर इंसान हिम्मत रखे तो वो खुद को फिर से पा सकता है।
Keywords: Rhinophyma, Rare Disease, Scotland Man, Nose Surgery, Skin Condition

