करवा चौथ का त्योहार आते ही घरों में खुशियों की बहार छा जाती है, जहां सुहागिनें पूरे दिन बिना पानी-पानी के व्रत रखती हैं और शाम को चांद की चांदनी में पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं। यह पर्व प्यार और समर्पण का प्रतीक है, लेकिन पूजा खत्म होने के बाद कई महिलाएं सोच में पड़ जाती हैं कि करवा, छलनी और करवा माता की तस्वीर का क्या करें। शास्त्रों में इनका खास महत्व है, और इन्हें बेकार फेंकना या कूड़े में डालना अशुभ माना जाता है। सही तरीके से इनका निपटान करना जरूरी है, ताकि माता की कृपा बनी रहे और वैवाहिक जीवन में सुख बना रहे।
करवा को नदी में बहाकर करें विदाई
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी का करवा सबसे पवित्र वस्तु होता है, जिसमें जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य चढ़ाया जाता है। पूजा के बाद इस करवे को घर में रखना या फेंकना शुभ नहीं माना जाता। परंपरा के मुताबिक, अगले दिन सुबह स्नान करके करवा को किसी नदी, तालाब या बहते पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए। यह जल में मिलकर पृथ्वी को शुद्ध करता है और माता की कृपा लाता है। अगर आपके इलाके में नदी न हो, तो करवे को पीपल, बरगद या नीम जैसे पवित्र वृक्ष के नीचे दबा दें। कई जगहों पर लोग पुराने करवे को अगले साल के लिए रख लेते हैं, लेकिन नया लाना ज्यादा शुभ होता है। इससे पूजा की पवित्रता बनी रहती है।
छलनी को साफ रखें, अगले व्रत की सजावट बने
छलनी पूजा का अनमोल हिस्सा है, जिसके माध्यम से चांद और फिर पति का चेहरा देखा जाता है। यह वस्तु पूजा की ऊर्जा सोख लेती है, इसलिए इसे रसोई में इस्तेमाल करना या कूड़ेदान में फेंकना वर्जित है। पूजा खत्म होने के बाद छलनी को गुनगुने पानी से धो लें और साफ कपड़े में लपेटकर पूजा स्थल या अलमारी में रख दें। कई सुहागिनें इसे अगले करवा चौथ तक संभालकर रखती हैं, और फिर से इस्तेमाल करती हैं। यह परंपरा वैवाहिक बंधन की मजबूती का प्रतीक है। बस ध्यान रखें कि छलनी पर धूल न जमे, ताकि इसकी शुभता बरकरार रहे।
माता की तस्वीर मंदिर में दान करें, सौभाग्य लाएं
करवा माता की तस्वीर या कैलेंडर पूजा थाली का अभिन्न अंग होता है, जो गौरी-शिव की आराधना का माध्यम बनता है। पूजा के बाद इसे कहीं भी फेंकना या टेबल पर रखना अशुभ फल दे सकता है। शास्त्र कहते हैं कि अगले दिन स्नान के बाद तस्वीर को साफ कपड़े से पोंछें और नजदीकी मंदिर में दान कर दें। अगर मंदिर दूर हो, तो इसे पवित्र वृक्ष के नीचे रखें या बहते पानी में प्रवाहित करें। हर साल नई तस्वीर लाना बेहतर है, क्योंकि पुरानी में पूजा की ऊर्जा सोख ली जाती है। यह दान माता को प्रसन्न करता है और घर में सुख-शांति लाता है।
पूजा थाली को शुद्ध रखें, प्रसाद बांटें
पूजा थाली में रोली, चावल, मिठाई और दीया जैसी वस्तुएं रखी जाती हैं, जो व्रत की सफलता का प्रतीक हैं। पूजा खत्म होने के बाद थाली को अच्छे से धो लें और बची मिठाई को परिवार में प्रसाद के रूप में बांट दें। थाली को साफ करके पूजा कोने में रख दें, ताकि अगले त्योहार पर फिर काम आए। यह थाली वैवाहिक जीवन की नींव मानी जाती है, इसलिए इसका सम्मान जरूरी है।
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