टीवी की मशहूर अदाकारा और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में सोहा अली खान के पॉडकास्ट में अपने करियर के शुरुआती संघर्षों पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में कदम रखते ही उन्हें बराबरी का अवसर नहीं मिला। लोग अक्सर उन्हें क्रैपी एक्टर यानी खराब अदाकारा कहकर आंकते थे।
स्मृति ने खुलासा किया कि धारावाहिकों में काम करने के बावजूद उन्हें मेल एक्टर्स के मुकाबले कम मेहनताना मिलता था। एक ही शो में काम करने के बावजूद पुरुष कलाकार उनसे कहीं ज्यादा फीस पाते थे। अपने लोकप्रिय किरदार तुलसी विरानी (क्योंकि सास भी कभी बहू थी) के समय को याद करते हुए उन्होंने कहा, “जहाँ भी जाती थी, लोग कहते थे कि मैं एक खराब एक्टर हूं, जबकि उसी शो में मेरे साथ काम करने वाले मेल एक्टर्स को ज्यादा पैसे दिए जाते थे।”
शुरुआती दिनों की मुश्किलें
स्मृति ईरानी ने अपने करियर की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से की थी। उन्होंने बताया कि उनकी पहली नौकरी दिल्ली के जनपथ पर थी, जहाँ उन्हें केवल 200 रुपये प्रतिदिन की सैलरी मिलती थी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस दौर में आगे बढ़ने का कोई बड़ा मौका नहीं मिल पाया।
इसी संघर्ष के बीच स्मृति के मन में यह सवाल उठने लगा था कि कब तक वे केवल किसी की बेटी या पत्नी बनकर जिएंगी। उन्होंने अपने पिता से तकरीबन गुस्से में कहा था, “कब तक किसी की बेटी या पत्नी बनकर जिऊंगी? अपने लिए कब जिऊंगी?”
आज की स्मृति की सलाह
पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि अगर आज की स्मृति 25 साल पहले की तुलसी से मिलें, तो क्या सलाह देंगी, तो वे मुस्कुराकर बोलीं,“बेहतर मेहनताना मांगना चाहिए था।” यह जवाब उनके संघर्ष और आत्मसम्मान दोनों को दर्शाता है।
राजनीति में सफर
स्मृति ईरानी का करियर केवल टीवी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2003 में राजनीति में कदम रखा। साल 2019 में उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी को हराकर इतिहास रच दिया और सुर्खियों में छा गईं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन एक मजबूत और बेबाक नेता के रूप में उनकी पहचान अब भी कायम है।
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