कैसे हुआ हादसा?
दरअसल जगमोहन शिवकिरण चौधरी अपने इलाके में दही हांडी की रस्सी बांध रहा था। वह दो मंज़िला इमारत की पहली मंज़िल पर चढ़ा हुआ था, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह घर की ग्रिल में जा गिरा। परिजन उसे तुरंत शताब्दी अस्पताल, गोवंडी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के अलावा, शहरभर में पिरामिड बनाने और अन्य आयोजनों के दौरान कई गोविंदाओं को चोटें आईं। अलग-अलग अस्पतालों में अब तक 30 घायलों के भर्ती होने की सूचना मिली है।
कूपर अस्पताल में 18 लोग भर्ती हुए, जिनमें से 12 का इलाज जारी है और 6 को छुट्टी दे दी गई। सियॉन अस्पताल में 6 लोग भर्ती हुए, जिनमें 3 अब भी उपचाराधीन हैं। नायर अस्पताल में भी 6 घायल पहुंचे, जिनमें से 1 का इलाज चल रहा है और 5 डिस्चार्ज कर दिए गए। कुल मिलाकर 30 लोग घायल हुए, जिनमें से 15 का इलाज चल रहा है और 15 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि मानखुर्द की घटना को छोड़कर शहर में कहीं और बड़ा हादसा सामने नहीं आया।
रिहर्सल के दौरान मासूम की मौत!
गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएं हर साल सामने आती हैं, अभी हाल में ही दहिसर इलाके में दही हांडी उत्सव के रिहर्सल के दौरान रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया था। इस घटना में 11 वर्षीय बच्चे महेश रमेश जाधव की मौत हो गई थी।
जानकारी के मुताबिक, रिहर्सल के दौरान महेश पिरामिड के छठे तल पर चढ़ा हुआ था। बैलेंस बिगड़ने की वजह से वह नीचे गिर गया। मौके पर न तो गद्दी बिछाई गई थी, न ही कोई सुरक्षा जाल या सेफ्टी बेल्ट का इंतज़ाम किया गया था। सुरक्षा की कमी के चलते मासूम की जान चली गई।ये सभी हादसे एक बार फिर सवाल खड़े कर रहे हैं कि उत्सव की खुशियों के बीच बच्चों की सुरक्षा को आखिर कब प्राथमिकता दी जाएगी?
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