अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त को अलास्का में मुलाकात होने जा रही है, जिसमें यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर चर्चा होगी। ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए इस ऐतिहासिक बैठक की घोषणा की है।
तीन साल से ज्यादा समय से हो रहे रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर मिलने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता अलास्का में मिलेंगे और बातचीत करेंगे।. वहीं क्रेमलिन ने भी बात में इसकी पुष्टि की। दोनों पक्षों ने हाल ही में एक शिखर सम्मेलन होने के संकेत दिए थे। रूस ने अलास्का में होने वाले शिखर सम्मेलन की पुष्टि करते हुए इसे तार्किक बताया। इस बैठक का उद्देश्य यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक शांति समझौते पर बातचीत करना है।
यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी लंबे समय से किसी भी ऐसे समझौते का विरोध करते रहे हैं, जिसमें रूस को डोनेत्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया जैसे कब्जाए गए क्षेत्रों पर अधिकार दे दिया जाए। वहीं, पुतिन बार-बार कह चुके हैं कि किसी भी डील में यूक्रेन को 2014 के बाद से रूस के कब्जे में आए कुछ क्षेत्रों को छोड़ना होगा। इसके साथ ही वे पश्चिमी देशों से यूक्रेन को दी जा रही सैन्य मदद रोकने और नाटो में शामिल होने की कोशिश खत्म करने की मांग भी रखते हैं। ट्रंप ने साल 2024 में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान और अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में कहा था कि यदि पुतिन जंग रोक देते हैं तो वह उनकी मांगों पर विचार करने को तैयार हैं। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा था कि वह जंग को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं।
दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी भी समझौते पर तब तक नहीं पहुंचेंगे, जब तक अमेरिका और यूरोप उन्हें यह गारंटी न दे दे कि यूक्रेन कभी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा और उसे सुरक्षा गारंटी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, पुतिन इस बात पर अपना जोर देंगे कि अमेरिका व यूरोप क्रीमिया और जंग के दौरान रूसी सेना द्वारा कब्जाए गए इलाकों को अब रूसी अधिकार क्षेत्र माने।
वहीं, 15 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बातचीत भारत के लिए बेहद अहम है। अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया। रूसी तेल खरीदने के कारण उसने और 25 फीसदी टैरिफ लगाने और सेकेंडरी सैंक्शन लगाने का एलान किया है। ये टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो जाएगा। यदि 15 अगस्त को होने वाली बातचीत फेल होती है तो कुल 50 फीसदी टैरिफ का बोझ भारतीय निर्यातकों के माथे पर पड़ेगा। इससे
निर्यात घटेगा और कमाई कम होगी। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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