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पाकिस्तान में हुआ आतंकी हमला, 1 लेफ्टिनेंट कर्नल समेत 11 सैनिकों की मौत

पाकिस्तान की सेना पर बहुत बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर समेत 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गयी है।

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पाकिस्तान में एक बार फिर आतंकवाद का साया गहराता दिखाई दे रहा है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के ओरकजई इलाके में पाकिस्तान सेना पर बड़ा हमला हुआ है, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर समेत 11 सैनिकों की मौत हो गई। पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने बताया कि यह मुठभेड़ 7 और 8 अक्टूबर की रात को हुई। सेना को इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद अभियान चलाया गया। हालांकि, आतंकियों ने पहले से घात लगाकर हमला कर दिया, जिससे सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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टीटीपी ने ली जिम्मेदारी, सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 19 आतंकी ढेर

पाकिस्तान तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। ISPR के मुताबिक, सेना ने जवाबी कार्रवाई में 19 आतंकवादियों को मार गिराया है। बयान में कहा गया है कि अभियान अभी भी जारी है और इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसी भी बचे हुए आतंकी को खत्म किया जा सके। पाकिस्तान सेना ने इस ऑपरेशन को “फितना अल-खवारिज” नाम दिया है, जो टीटीपी जैसे चरमपंथी संगठनों के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है।

खैबर पख्तूनख्वा सबसे अधिक प्रभावित इलाका

सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 2025 की तीसरी तिमाही में हिंसा से जुड़ी घटनाओं में सबसे अधिक मौतें खैबर पख्तूनख्वा में हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में हुई कुल हिंसक घटनाओं का 67 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में दर्ज किया गया, जबकि कुल मौतों का 71 प्रतिशत यानी 638 लोगों की जानें यहीं गईं। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, दोनों ही प्रांत अफगानिस्तान से सटे हुए हैं, जिससे सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है। अफगान सीमा के पार सक्रिय आतंकी संगठनों को अक्सर वहां से समर्थन मिलने की खबरें आती रही हैं।

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क्या है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)?

टीटीपी की स्थापना वर्ष 2007 में दक्षिण वजीरिस्तान के एक प्रभावशाली नेता बैतुल्लाह महसूद ने की थी। इस संगठन की जड़ें अफगान तालिबान से जुड़ी हुई हैं, लेकिन यह पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से काम करता है। शुरुआत में इसका उद्देश्य पाकिस्तान में शरीयत कानून लागू करना था, लेकिन धीरे-धीरे यह संगठन देश के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया। वर्ष 2020 के बाद से टीटीपी ने कई बिखरे हुए गुटों को दोबारा एकजुट किया, जिससे इसकी ताकत में बढ़ोतरी हुई। संगठन ने खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती इलाकों में हमलों की रफ्तार तेज की है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है।

Keywords: Pakistan Army Attack, Khyber Pakhtunkhwa, TTP Attack, ISPR Statement, Pakistan Terrorism, Pakistan Security Forces

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