पाकिस्तान की राजनीति और भ्रष्टाचार को लेकर एक बहुत बड़ा दावा सामने आया है जिसने दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको ने यह दावा किया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को लाखों डॉलर की मदद देकर एक तरह से ‘खरीद’ लिया था। किरियाको ने बताया कि मुशर्रफ़ ने अमेरिका को इतनी छूट दे दी थी कि उन्होंने अपने देश के परमाणु हथियारों तक की जानकारी अमेरिका को दे दी थी।
सीआईए में लगभग पंद्रह सालों तक काम कर चुके जॉन किरियाको ने बताया कि अमेरिकी सरकार हमेशा ऐसे तानाशाहों के साथ काम करना पसंद करती है, क्योंकि तब उन्हें आम लोगों की राय और मीडिया की कोई परवाह नहीं करनी पड़ती। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उस समय जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान के मुखिया थे, और अमेरिका ने उन्हें करोड़ों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद दी। किरियाको ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने मुशर्रफ़ को असल में ‘खरीद’ लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग मुशर्रफ़ से हफ़्ते में कई बार मिलते थे और वह उन्हें जो कुछ भी वे चाहते थे, सब करने देते थे।
परमाणु हथियारों का कंट्रोल अमेरिका के पास
पूर्व अधिकारी किरियाको ने एक और सनसनीखेज़ खुलासा किया कि साल 2002 में पाकिस्तानी परमाणु हथियारों का कंट्रोल अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन के हाथ में था। किरियाको ने दावा किया कि उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया गया था कि मुशर्रफ़ ने खुद अपने परमाणु जखीरे का कंट्रोल अमेरिका को सौंप दिया था। यह बात उस समय की है जब दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला हुआ था और भारत-पाकिस्तान युद्ध के कगार पर खड़े थे। किरियाको ने कहा कि मुशर्रफ ऐसा इसलिए कर रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं ये परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ न लग जाएं। हालांकि, पाकिस्तान ने हमेशा इन दावों को गलत बताया है और कहा है कि उसके जनरल ही इन हथियारों को संभालते हैं।
मुशर्रफ का भारत के खिलाफ दोहरा खेल
किरियाको ने मुशर्रफ़ के काम करने के तरीके को ‘दोहरा जीवन’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुशर्रफ़ को सेना को खुश रखना था और सेना अल-क़ायदा की बजाय भारत की चिंता ज्यादा करती थी। इसलिए, सेना को खुश रखने के लिए मुशर्रफ़ आतंकवाद-रोधी अभियानों में अमेरिका का साथ देने का दिखावा करते थे, लेकिन साथ ही वह भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियाँ भी जारी रखने देते थे। किरियाको ने कहा कि पाकिस्तान का भारत के खिलाफ आतंकवाद करना एक ‘खुला राज’ था और किसी ने इसे रोका नहीं। उन्होंने मुंबई हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि यह अल-क़ायदा नहीं बल्कि पाकिस्तानी समर्थक कश्मीरी ग्रुप का काम है, और बाद में यही सही साबित हुआ।
पाकिस्तान में नेताओं का गहरा भ्रष्टाचार
सीआईए के पूर्व अधिकारी किरियाको ने पाकिस्तान में नेताओं के गहरे भ्रष्टाचार पर भी बात की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो का एक किस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जब भुट्टो दुबई में पाँच मिलियन डॉलर के महल में रह रही थीं, तब वह एक और अधिकारी के साथ उनसे मिलने गए थे। किरियाको ने बताया कि भुट्टो ने उनसे शिकायत की थी कि उनके पति आसिफ अली ज़रदारी ने एक और बेंटले कार खरीद ली है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि पाकिस्तान के नेता किस तरह के भ्रष्टाचार में डूबे थे, जबकि देश की आम जनता भूख से जूझ रही थी। यह दावा पाकिस्तान की राजनीति में बड़े सवालों को खड़ा करता है।
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