पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान उन्होंने पैदल मार्च किया और अपना पर्चा भरा। इस मौके पर ममता बनर्जी ने कहा, “मैं बचपन से यहीं रह रही हूँ, मेरे पास जो कुछ भी है, वह सब यहीं का है। मैं भवानीपुर के लोगों को धन्यवाद देती हूँ और उन्हें सलाम करती हूँ। मैंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है और मैं सभी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की कामना करती हूँ। हम सरकार बनाएंगे।”
बता दें कि पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट इस बार राजनीतिक रूप से बेहद अहम हो गई है, जहां मुकाबला सीधा और कड़ा दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर इस सीट से चुनाव मैदान में हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने उनके सामने शुभेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में नामांकन दाखिल करते समय शक्ति प्रदर्शन किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी इस सीट को हल्के में नहीं ले रही है। उनके नामांकन के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिससे इस सीट की अहमियत और भी बढ़ गई है।
भवानीपुर अब सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बन चुका है। 2026 के चुनावों में यह सीट सत्ता और सियासी वर्चस्व की लड़ाई का बड़ा प्रतीक बन गई है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।
कब होगा चुनाव और कब आएगा परिणाम
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों का आधिकारिक ऐलान हो चुका है, जिसके साथ ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को कराई जाएगी। सभी चरणों के बाद 4 मई को मतगणना की जाएगी और इसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इन आंकड़ों को भी समझें
पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है, जो राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाती है। 294 सदस्यीय विधानसभा में ऐसे लगभग 40 से 50 निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं।
मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत सबसे अधिक है। इन क्षेत्रों के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जिसके कारण इन सीटों पर उनका वोट निर्णायक बन जाता है और चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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