तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के सरकारी अस्पताल में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 45 साल का एक व्यक्ति किडनी की बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल आया था। डॉक्टरों ने उसे बिना ठीक से जांचे मृत घोषित कर शवगृह भेज दिया। कुछ देर बाद जब पुलिस पहुंची, तो पता चला कि वह अभी भी जिंदा है और उसकी सांसें चल रही हैं।
आधार कार्ड न होने पर इलाज से इनकार
मृत घोषित किए गए व्यक्ति ने बताया कि वह ट्रक चालक है और पिछले पांच दिनों से किडनी की समस्या से जूझ रहा था। इलाज के लिए जब वह अस्पताल पहुंचा, तो डॉक्टरों ने उसका आधार कार्ड न होने और किसी परिचित के साथ न आने के कारण भर्ती करने से मना कर दिया। उसके पास घर लौटने के पैसे भी नहीं थे, इसलिए वह दो दिन तक अस्पताल के परिसर में ही पड़ा रहा। इस दौरान उसकी तबीयत और बिगड़ गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
मुर्दाघर की बेंच से लेकर मौत के कमरे तक
व्यक्ति ने बताया कि एक अस्पताल कर्मचारी ने उसे देखा और मुर्दाघर के बाहर रखी बेंच पर लिटा दिया। कुछ समय बाद, शायद अंधेरे या लापरवाही के कारण, कुछ लोगों ने उसे मृत समझकर शवगृह के अंदर रख दिया। रात में जब पुलिस को “एक अज्ञात शव” की सूचना मिली और अधिकारी जांच के लिए पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि व्यक्ति की सांसें चल रही हैं और वह जिंदा है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उसकी जान बच गई और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
हेल्थ डिपार्टमेंट ने दी सफाई
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने बताया कि उस व्यक्ति की किसी डॉक्टर ने जांच नहीं की थी, इसलिए उसे आधिकारिक रूप से मृत घोषित नहीं किया गया था। अब यह जांच की जा रही है कि आखिर किसने और कैसे उसे शवगृह तक पहुंचाया। पुलिस ने अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन यह पूरी घटना अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को दिखाती है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
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