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UPI के जरिए जासूसी: पाक ने भारत में बनाया गुप्त पैसा नेटवर्क

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पाकिस्तान की जासूसी साजिश का खुलासा किया, जिसमें UPI और छोटे व्यापारियों का इस्तेमाल कर सीआरपीएफ अफसर को पैसे भेजे गए, विदेशी रास्तों से फंडिंग का भी पर्दाफाश हुआ।

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक चौंकाने वाली खबर दी। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने भारत में जासूसी के लिए गुप्त तरीके से पैसा भेजा। इस साजिश में डिजिटल भुगतान और छोटे व्यापारियों का इस्तेमाल हुआ। एनआईए ने मई 2025 में सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मोती राम जाट को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी एजेंटों को सेना की गोपनीय जानकारी दी। जांच में पता चला कि उन्हें UPI के जरिए पैसे मिले, जो आम लेन-देन की तरह लगते थे।

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UPI से छिपा खेल

पाकिस्तान ने जासूसी के लिए UPI जैसे डिजिटल भुगतान का गलत इस्तेमाल किया। छोटे दुकानदारों को नकली बिल भेजे गए, जिन्हें लगता था कि वे सामान का पैसा दे रहे हैं। असल में यह पैसा जासूसी में शामिल लोगों तक पहुंचता था। उदाहरण के लिए, कपड़े और लग्जरी सामान दुबई के रास्ते भारत आए। वहां से बिचौलियों ने भारतीय दुकानदारों को UPI से भुगतान करने को कहा। मोती राम जाट को अक्टूबर 2023 से अप्रैल 2025 तक 1.90 लाख रुपये मिले। यह रकम उनके और उनकी पत्नी के खातों में भेजी गई, जो बाहर से सामान्य व्यापार का हिस्सा लगती थी।

विदेशी रास्तों का इस्तेमाल

इस साजिश में विदेशी रास्तों का भी सहारा लिया गया। थाईलैंड में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के कारोबारी इसमें शामिल थे। वे पर्यटकों को सस्ते दाम पर विदेशी मुद्रा देने का लालच देते। पर्यटक नकद थाई बाहत देते, और बदले में उनके भारतीय खातों से UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर होते। इस तरह जासूसी का पैसा भारत पहुंचता, बिना किसी सरकारी रिकॉर्ड के। यह तरीका इतना चालाक था कि सामान्य जांच में पकड़ना मुश्किल था। एनआईए ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई देशों की एजेंसियों से संपर्क किया।

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छोटे दुकानदार बने शिकार

दिल्ली और मुंबई के छोटे मोबाइल दुकानदार इस साजिश का हिस्सा बन गए। ये दुकानदार आमतौर पर प्रवासी मजदूरों के लिए पैसे भेजने की सेवा देते हैं। लेकिन कुछ ने अनजाने में अपने खातों से पैसे ट्रांसफर किए। कोई नकद देता, और दुकानदार UPI से रकम भेज देता। इस दौरान भेजने वाले की असली पहचान छिपी रहती थी। इससे जासूसी नेटवर्क को गुप्त रहने में आसानी हुई। कई दुकानदारों को नहीं पता था कि उनके लेन-देन का इस्तेमाल जासूसी के लिए हो रहा है।

एनआईए की सख्त कार्रवाई

एनआईए ने इस साजिश को उजागर करने के लिए आठ राज्यों में 15 जगहों पर छापे मारे। मई 2025 से शुरू हुई जांच में सैकड़ों बैंक खातों की पड़ताल हुई। अधिकारियों ने पाया कि यह नेटवर्क छोटे व्यापारियों और सामान्य लोगों की अनजान भागीदारी से चल रहा था। एनआईए ने अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और बाकी लोगों की तलाश जारी है। इस खुलासे से देश की सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत सामने आई है।

Keywords:Pakistan Spying Network, Upi Misuse India, Crpf Officer Arrest, Secret Funding Exposed, Nia Investigation 2025

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