आजकल एआई की दुनिया में एक नाम जो हर तरफ सुनाई दे रहा है, वो है अरविंद श्रीनिवास। 31 साल के इस चेन्नई बॉय ने एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में डेब्यू किया। वे भारत के सबसे युवा अरबपति बने। उनकी संपत्ति 21,190 करोड़ रुपये है। परप्लेक्सिटी एआई कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ हैं अरविंद। ये कंपनी एआई से चलने वाला सर्च इंजन है। गूगल जेमिनी और चैटजीपीटी को कड़ी चुनौती दे रहा है। अमेरिका में बसे अरविंद की कहानी साधारण परिवार से शुरू होती है। लेकिन मेहनत ने उन्हें स्टार बना दिया।
चेन्नई की गलियों से होनहार का जन्म
अरविंद का जन्म 7 जून 1994 को चेन्नई में हुआ। उनका परिवार साधारण था। बचपन से टेक्नोलॉजी, गणित और साइंस में रुचि थी। स्कूल में हमेशा आगे रहते। मेहनत से नेशनल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप जीती। ये बड़ी बात थी। स्कूल के बाद आईआईटी मद्रास पहुंचे। वहां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक किया। आईआईटी जैसे मुश्किल जगह से निकले तो रास्ता आसान लगने लगा। लेकिन अरविंद रुके नहीं। अमेरिका चले गए। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी ली। मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रिसर्च की। उनके पेपर आईसीएलआर, एएएआई और न्यूरआईपीएस जैसे बड़े कांफ्रेंस में छपे। ये सब देखकर लगता है कि अरविंद हमेशा आगे की सोच रखते थे।
बड़े नामों से सीख का सफर
अरविंद का करियर ओपनएआई से शुरू हुआ। 2018 में वहां इंटर्नशिप की। रीइन्फोर्समेंट लर्निंग पर काम किया। थोड़ा समय बाद कंपनी छोड़ी। लेकिन 2021 में वापस लौटे। रिसर्च साइंटिस्ट बने। डैल-ई 2 जैसे टेक्स्ट-टू-इमेज मॉडल में हाथ बंटाया। फिर डीपमाइंड गए। वहां बड़े लर्निंग मॉडल्स पर ट्राई किया। एआई में उनकी समझ और गहरी हो गई। गूगल में भी समय बिताया। विजन ट्रांसफॉर्मर जैसे हेलोनेट और रेसनेट-आरएस पर काम किया। इन जगहों ने अरविंद को ताकत दी। वे कहते हैं कि यहां बड़े दिमागों से मिले। सीखने का मौका मिला। एआई की दुनिया में नाम कमाया। लेकिन मन में कुछ बड़ा करने का ख्याल था।
परप्लेक्सिटी एआई: सपनों का नया रूप
2022 में अरविंद ने कदम बढ़ाया। एंडी कोनविंस्की, डेनिस याराट्स और जॉनी हो के साथ परप्लेक्सिटी एआई शुरू की। ये एआई सर्च इंजन पुराने सर्च को बदल रहा है। जवाब तेज और सही देता है। कंपनी की वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर हो गई। जेफ बेजोस, एनवीडिया और नेट फ्रीडमैन जैसे बड़े निवेशकों ने पैसा डाला। अरविंद कहते हैं कि परप्लेक्सिटी सवालों के सबसे तेज जवाब देता है। भारत में यूजर्स सबसे ज्यादा हैं। कंपनी गूगल को टक्कर दे रही है। हाल ही में क्रोम ब्राउजर के लिए 34.5 अरब डॉलर की बोली लगाई। ये खबर ने हलचल मचा दी। अरविंद ने कंपनी को आजाद रखा। 2028 के बाद आईपीओ का प्लान है।
युवा ताकत का गौरव
अरविंद की कामयाबी युवाओं के लिए मिसाल है। 31 साल में अरबपति बनना कोई आसान नहीं। लेकिन मेहनत ने दिखा दिया। चेन्नई बॉय के नाम से मशहूर हैं। मां चाहती थीं गूगल में नौकरी करें। लेकिन अरविंद ने अपना रास्ता चुना। कहते हैं कि भारतीय फाउंडर बेहतर होते हैं। परप्लेक्सिटी के 30 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। दुनिया भर में। कंपनी एआई को नया चेहरा दे रही है। जवाबों के साथ सोर्स भी बताती है। भरोसा बढ़ाती है। अरविंद ने इन्वेस्टर बनना शुरू किया। 2023 से एआई स्टार्टअप्स में पैसा लगा रहे। जैसे इलेवनलैब्स और सूनो। ये टेक्स्ट-टू-स्पीच और टेक्स्ट-टू-म्यूजिक टूल्स हैं। उनकी सोच आगे की है। भारत को डीप-टेक का हब बनाना चाहते हैं।
एआई का नया दौर
परप्लेक्सिटी ने सर्च बदल दिया। पहले लिंक्स मिलते। अब सीधे जवाब। साइटेड आंसर्स। यूजर्स को अच्छा लगा। कंपनी तेज बढ़ी। एप्पल और मेटा ने खरीदने की कोशिश की। लेकिन अरविंद ने ना कहा। आजादी पर जोर। भारत में यूजर सबसे ज्यादा। अरविंद कहते हैं कि भारत ग्रोथ का केंद्र है। हुरुन लिस्ट में शाहरुख खान और मुकेश अंबानी जैसे नाम हैं। लेकिन अरविंद सबसे युवा। 2025 की लिस्ट में 358 अरबपति हैं। भारत अब तीसरा बड़ा बिलियनेयर हब। अमेरिका और चीन के बाद। अरविंद की एंट्री दिखाती है कि टेक फाउंडर्स का समय आ गया।
चेन्नई से सिलिकॉन वैली का सफर
अरविंद की कहानी साधारण है। आईआईटी से निकले। बर्कले गए। ओपनएआई, डीपमाइंड, गूगल में काम किया। फिर अपना स्टार्टअप। आज 21,190 करोड़ की संपत्ति। लेकिन वे जमीन से जुड़े रहते। कहते हैं कि मां की डांट याद है। गूगल जॉब छोड़कर स्टार्टअप किया तो घरवालों ने कहा पागल हो गए। लेकिन अब गर्व करते। अरविंद युवाओं से कहते हैं कि रिस्क लो। सीखो। एआई भविष्य है। भारत में टैलेंट भरा पड़ा। बस मौका चाहिए। उनकी कहानी हर स्टूडेंट पढ़े। चेन्नई की गलियां आज गर्व से चमक रही हैं।
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