मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना के उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज उनकी राजनीति हिंदुत्व के दायरे से निकलकर पूरी तरह जिहादी मानसिकता की तरफ झुक गई है। निरुपम ने आरोप लगाया कि बालासाहेब ठाकरे द्वारा हिंदुओं की आवाज़ उठाने के लिए शुरू किया गया अख़बार ‘सामना’ अब उद्धव नेतृत्व में जिहादी तत्वों की भाषा बोलने लगा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना की मूल विचारधारा को कमजोर करने वाले निर्णय आज उद्धव ठाकरे के नेतृत्व की पहचान बन रहे हैं।
तमिलनाडु मंदिर विवाद को लेकर शिवसेना की नाराजगी
निरुपम ने अपने बयान में तमिलनाडु के उस विवाद का जिक्र किया जिसमें न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने मंदिर में दीप प्रज्वलन का आदेश दिया था। इस आदेश का कुछ कट्टरपंथी समूहों ने विरोध किया और कथित रूप से डीएमके सरकार ने धार्मिक परंपरा को रोकने का निर्णय लिया। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया और सरकार ने आदेश पर रोक लगवा ली। निरुपम ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में उद्धव गुट के सांसद अरविंद सावंत के हस्ताक्षर यह स्पष्ट करते हैं कि उद्धव अब उन दलों के साथ खड़े हैं जिन्हें हिंदू-विरोधी माना जाता है। उनके अनुसार, यह निर्णय उद्धव की राजनीतिक दिशा में आए बड़े बदलाव का संकेत देता है।
बालासाहेब का हिंदुत्व और उद्धव की बदलती राजनीति
संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का पूरा राजनीतिक जीवन आक्रामक हिंदुत्व के समर्थन में गुजरा। राम मंदिर आंदोलन में शिवसैनिकों की भूमिका को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि लाखों शिवसैनिकों ने अयोध्या में कारसेवा कर मंदिर निर्माण के सपने को आगे बढ़ाया था। निरुपम का दावा है कि वहीं दूसरी ओर, आज उद्धव ठाकरे दीप प्रज्वलन जैसे धार्मिक प्रतीकात्मक कार्यों का भी विरोध करने वालों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यह बालासाहेब के हिंदुत्व का पूर्णत: परित्याग है और जनता ने इसी वजह से विधानसभा चुनाव में उद्धव की नीतियों को नकार दिया।
“मंदिर में दीप नहीं जलाएं तो क्या श्मशान में जलाएं?”
प्रेस वार्ता के दौरान निरुपम ने अपने बयान को और कड़ा करते हुए कहा कि हिंदू धार्मिक परंपराओं का विरोध करना शिवसेना की असली संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर मंदिर में दीप जलाना भी अब स्वीकार नहीं किया जा रहा, तो क्या अब श्मशान में दीप जलाए जाएंगे?” निरुपम ने यह भी दावा किया कि उद्धव ठाकरे अब पूरी तरह से हिंदू-विरोधी सोच के साथ खड़े हैं, और इस बदलाव से उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि शिवसेना अब उद्धव ठाकरे की ‘दीप-विरोधी’ राजनीति का जवाब जनता के बीच जाकर देगी और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को फिर से स्थापित करेगी।
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