फिल्म ‘विरासत’ को रिलीज़ हुए अब 28 साल से ज़्यादा हो चुका हैं, लेकिन आज भी यह फिल्म हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पारिवारिक ड्रामों में गिनी जाती है। अनिल कपूर और तब्बू की जोड़ी, विशाल भारद्वाज का संगीत और प्रियदर्शन का निर्देशन सब कुछ बेहतरीन था। मगर इस फिल्म का सबसे बड़ा जादू था अमरीश पुरी का राजा ठाकुर किरदार, जिसने एक पूरी पीढ़ी पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। लेकिन सोचिए, अगर उस समय दिलीप कुमार यह फिल्म कर लेते तो?क्या फिल्म वैसी ही बन पाती जैसी आज याद की जाती है?
कमल हासन का अधूरा सपना
आपको बता दें विरासत फिल्म तमिल ब्लॉकबस्टर थेवर मगन का हिंदी रीमेक थी और कमल हासन इसके निर्माता, कमल हासन का सपना था कि इस बार वे खुद बेटे की भूमिका निभाएं और पिता का रोल दिलीप कुमार करें।उनका मानना था कि अगर दिलीप साहब पर्दे पर पिता का किरदार निभाएंगे, तो फिल्म की आत्मा और भी गहरी हो जाएगी। कमल हासन ने उन्हें समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी यहां तक कि उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि अगर वे पिता नहीं बनना चाहते तो बेटे की भूमिका शाहरुख खान निभा सकते हैं। लेकिन, किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। दिलीप कुमार ने निजी कारणों से यह ऑफर ठुकरा दिया।
किरदार जिसे ठुकराया गया, वही बन गया अमर
दिलीप कुमार के बाद यह रोल नसीरुद्दीन शाह तक पहुंचा, पर उन्होंने भी हाँ नहीं की। आख़िरकार यह रोल अमरीश पुरी के पास गया और वहीं से शुरू हुई एक नई विरासत की कहानी। अमरीश पुरी ने राजा ठाकुर के रूप में जो गहराई, तेज और सच्चाई दिखाई, उसने इस किरदार को लोग आज भी याद करते हैं ।
फिल्म का कमाल
करीब ₹4.5 करोड़ के बजट में बनी ‘विरासत’ ने भारत में ₹11.32 करोड़ की कमाई की। यह बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट नहीं थी, लेकिन सेमी-हिट रही और समीक्षकों ने इसे कला और मनोरंजन का बेहतरीन संगम बताया। समय के साथ यह फिल्म अनिल कपूर की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाने लगी।
बदलती सोच, अमर किरदार
आज जब हिंदी सिनेमा नई तकनीक, एआई विजुअल्स और ग्लोबल कहानियों के दौर में पहुंच चुका है, तब भी ‘विरासत’ जैसी फिल्मों को इमोशनल स्कूल ऑफ़ सिनेमा कहा जाता है। यह वो दौर था जब कहानी और किरदार, दोनों दर्शकों को छूते थे। अगर दिलीप कुमार यह फिल्म करते, तो शायद ‘विरासत’ की कहानी कुछ और होती, लेकिन शायद हम अमरीश पुरी राजा ठाकुर जैसा जादू कभी नहीं देख पाते।
कभी-कभी फिल्मों में जो रोल ठुकराया जाता है, वही किसी और के लिए करियर का ताज बन जाता है। दिलीप कुमार ने जो इंकार किया,वहा रोल अमरीश पुरी की विरासत बन गया और इस तरह एक अस्वीकार से शुरू हुई कहानी, फिल्म इतिहास की अमर विरासत बन गई।
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