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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक शुरू, घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई करने के दिए आदेश

योगी सरकार ने राज्य में घुसपैठियों पर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। पहचान, वेरिफिकेशन, डिटेंशन सेंटर और आधुनिक तकनीक के जरिए राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद बनाने की तैयारी तेज़ हो गई है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने अब अपराधियों, माफिया और अवैध गतिविधियों के बाद घुसपैठियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत राज्यभर में पहचान अभियान ( Verification Mission ) चलाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बढ़ती अवैध घुसपैठ सिर्फ सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं का फायदा भी गलत लोगों तक पहुंच रहा है। इस अभियान को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कहा जा रहा है क्योंकि यह तेज, स्पष्ट और बड़े लेवल पर किया जा रहा है।

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क्यों जरूरी पड़ा यह बड़ा कदम?

राज्य सरकार का दावा है कि घुसपैठियों की मौजूदगी से अपराध का ग्राफ बढ़ता है, अवैध नेटवर्क सक्रिय होते हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है। कई जिलों में यह देखा गया कि संदिग्ध व्यक्ति योजनाओं का लाभ लेकर असली पात्रों का हक छीन रहे थे। ऐसे में सरकार ने स्पष्ट किया है कि कठोर कार्रवाई से न सिर्फ अपराध पर लगाम लगेगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। सरकार चाहती है कि हर योजना का लाभ सिर्फ राज्य के वास्तविक नागरिकों को ही मिले, जिससे जनता का विश्वास और मजबूत हो।

हाई-टेक सिस्टम से पहचान

इस अभियान के तहत राज्य स्तर पर वेरिफिकेशन का काम शुरू हो चुका है। 17 शहरी निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध प्रवासियों की पूरी सूची तैयार कर अधिकारियों को सौंपें। पहचान प्रक्रिया में अब सिर्फ आधार या वोटर आईडी की सामान्य जांच नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक से दस्तावेजों को स्कैन किया जाएगा। फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन और पुराने रिकॉर्ड के मिलान की मदद से बायोमेट्रिक प्रोफाइल तैयार की जाएगी। सीमावर्ती जिलों खासकर नेपाल सीमा वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाकर सुरक्षात्मक नेटवर्क और मजबूत किया गया है। साथ ही, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गैंग पर भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

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अभेद डिटेंशन सेंटर और निर्वासन की प्रक्रिया

घुसपैठियों की पहचान होने के बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा। इसके लिए हर जिले में अस्थायी सेंटर बनाए जाएंगे और प्रत्येक संभाग में 15,000 क्षमता वाले स्थायी सेंटर तैयार किए जाएंगे। इन सेंटरों में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी जैसे सीसीटीवी कंट्रोल रूम, फेस रिकग्निशन सिस्टम और मजबूत संरचना, ताकि कोई भी फरार न हो सके। वेरिफिकेशन के बाद दोषी पाए गए लोगों को विदेशी अधिनियम 1946 के तहत देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि यह मॉडल पूरे देश में लागू हो, ताकि घुसपैठ की समस्या को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी को रोजगार देने या घर किराए पर देने से पहले उनके दस्तावेजों की अच्छे से जांच जरूर करें।

Keywords: Up Government, Infiltration Crackdown, Detention Centers, Illegal Immigrants, Security Operation, Foreign Act 1946

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