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‘शिक्षा के बावजूद जातिवाद क्यों?’, कर्नाटक के CM सिद्धारमैया ने की वैज्ञानिक सोच की मांग

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि आजकल जातिवाद सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों में दिखाई देता है। उन्होंने शिक्षा का असली उद्देश्य अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने हाल ही में एक ऐसा मुद्दा उठाया, जिस पर ज्यादातर लोग खुलकर बात करने से बचते हैं। उनका कहना है,’आज जातिवाद अनपढ़ लोगों में नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे समाज में ज्यादा दिखता है, और यही सबसे बड़ी चिंता है।’ गडग जिले के लक्ष्मेश्वर में भारत रत्न प्रो. सी.एन.आर. राव के 10वें वार्षिक साइंस आउटरीच प्रोग्राम में उन्होंने साफ कहा आज़ादी के 79 साल बाद, और देश में करीब 76 प्रतिशत साक्षरता के बावजूद, अगर जाति का भेदभाव खत्म नहीं हुआ, तो यह हमारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है। उन्होंने 850 साल पुराने बसवन्ना के संदेश की याद दिलाई “किसी से यह मत पूछो कि वह कौन है” और कहा कि आज भी यही सोच सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। सिद्धरामैया मानते हैं, जब तक पढ़े-लिखे लोग ही जाति और भेदभाव को ढोते रहेंगे, इंसानियत और बराबरी का सपना अधूरा रहेगा।

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डिग्री लेना असली शिक्षा नहीं है

मुख्यमंत्री ने साफ-साफ कहा, डिग्री पा लेना ही असली शिक्षा नहीं है। असल में, शिक्षा का मतलब है ‘वैज्ञानिक नजरिया और तर्कशील सोच’। उन्होंने माना कि कर्नाटक में अंधविश्वास विरोधी कानून होने के बावजूद, आज भी कई जगह अंधविश्वास फैले हुए हैं, और ये बसवन्ना की धरती के लिए वाकई शर्म की बात है। उनका कहना था, जब तक समाज से असमानता, अंधविश्वास और पुरानी बेकार परंपराएं खत्म नहीं होंगी, बराबरी और सभ्यता की बातें अधूरी रहेंगी। उन्होंने संविधान के मूल्यों ‘समानता, आज़ादी, भाईचारे’ की याद दिलाई और कहा, इन्हें किताबों तक मत रखो, असल ज़िंदगी में उतारो। उनके हिसाब से, आज भी यही सोच सबसे जरूरी है। जब तक पढ़े-लिखे लोग ही जाति और भेदभाव ढोते रहेंगे, इंसानियत और बराबरी का सपना अधूरा ही रहेगा।

युवाओं के लिए सिद्धरामैया का संदेश

अपने भाषण में सिद्धरामैया ने बी.एस. पाटिल का उदाहरण दिया कि कैसे एक किसान परिवार का लड़का, जिसने सेना में काम किया, बड़ी दुर्घटना झेली, लेकिन हार नहीं मानी और आखिरकार आईएएस बन गया। उन्होंने पाटिल की ईमानदारी, प्रशासनिक काम और राज्य के विकास के लिए उनकी मेहनत की तारीफ की। साथ ही ये भी जोड़ा कि शिक्षा सिर्फ एक भाषा या वर्ग तक सीमित नहीं होती; अगर इरादा और मेहनत हो, तो कोई भी शिखर छू सकता है। उनका संदेश साफ था, मुश्किल वक्त आने पर किस्मत को मत कोसो, आत्मविश्वास और मेहनत से आगे बढ़ो, सफलता ज़रूर मिलती है।

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प्रो. सी.एन.आर. राव: एक असली मिसाल

प्रो. सी.एन.आर. राव को मुख्यमंत्री ने देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में गिना। उन्होंने बताया कि राव ने कन्नड़ माध्यम से पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन अपनी लगन और मेहनत से विज्ञान में ऊंचा मुकाम पाया। उन्होंने ये भी कहा कि नेहरू ने वैज्ञानिक सोच को देश की तरक्की की नींव बताया था। सिद्धरामैया के मुताबिक, भारत जैसे विविध जाति-धर्म वाले देश में, असली सेक्युलर और बराबरी वाला समाज तभी बनेगा जब हर छात्र तर्क, विज्ञान और इंसानियत को अपनाए। असल में, शिक्षा, विज्ञान और समानता यही भारत के भविष्य की असली चाबी हैं।

Keywords: Siddaramaiah, Casteism In India, Education And Casteism, Karnataka CM News

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