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“कश्मीर में नेताओं को सवाल पूछना और जनता को जवाब देना भूल गए हैं”, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सियासी तंज

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कश्मीर की राजनीति में नेताओं और जनता, दोनों ने सवाल पूछने और जवाब देने की परंपरा लगभग खो दी है।

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श्रीनगर में नेहरू पार्क से क्राल सांगरी तक बुलेवार्ड रोड चौड़ीकरण परियोजना की आधारशिला रखते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर की राजनीति में सबसे बड़ी समस्या संवाद की कमी बन गई है। उनका कहना था, “हमने अब सवाल पूछने की आदत खो दी है और लोगों को जवाब देने की भी आदत नहीं रही।” यह सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि यह घाटी के सामाजिक और राजनीतिक माहौल का भी आईना थी।

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“जम्मू में जवाब मिलता है, कश्मीर में चुप्पी”

अब्दुल्ला ने हंसी-मज़ाक भरे अंदाज में कहा कि उनके भाषण और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के भाषण में फर्क साफ नजर आएगा, क्योंकि जम्मू की राजनीति संवाद पर आधारित है। उन्होंने बताया, “जम्मू में जब आप लोगों से पूछते हैं कि उन्हें क्या चाहिए, तो जवाब मिलता है, ‘सड़कें’। लेकिन घाटी में यही सवाल पूछो तो अक्सर कोई जवाब नहीं मिलता।” उन्होंने पुराने समय के अलगाववादी नारों का भी ज़िक्र किया और कहा कि वहां अक्सर जवाब “हम क्या चाहते?” जैसे सवालों में ही खो जाता था।

“आदत धीरे-धीरे लौट रही है”

उमर अब्दुल्ला ने माना कि पिछले 35 वर्षों में संवाद की परंपरा लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में अब नेता और आम लोग दोनों सवाल पूछने की दिशा में लौट रहे हैं। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा। उन्होंने कहा, “हम धीरे-धीरे उस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं, जहां राजनीति और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता फिर से मजबूत होगा।” उनके बयान से यह साफ होता है कि कश्मीर में राजनीति और जनता के बीच संवाद और विश्वास की बहाली एक लंबी लेकिन जरूरी प्रक्रिया है।

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राजनीति में पारदर्शिता और जनसंवाद की जरूरत

अब्दुल्ला के इस बयान को घाटी में बदलते राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। 2019 के बाद कश्मीर में शासन और लोकतांत्रिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में उनका यह संदेश सिर्फ सियासी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है कि राजनीति संवाद के बिना अधूरी रहती है। कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि नेता और जनता दोनों सवाल पूछने और जवाब देने की परंपरा को फिर से अपनाएं।

Keywords: Umar Abdullah, Jammu Kashmir Politics, Communication Gap, Boulevard Road Project

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