मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में सितंबर 2025 से छोटे बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। ये बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे और सर्दी-खांसी के लिए कोल्डरिफ सिरप पी रहे थे। यह सिरप तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स ने बनाया था। सिरप पीने के बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और किडनी की समस्या हुई। 4 अक्टूबर तक 20 बच्चों की जान चली गई। एक मां ने बताया कि सिरप देने के दो दिन बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और अस्पताल में बच नहीं सका। जांच में सिरप में 48.6% डायइथाइलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला रसायन मिला। स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इसे तमिलनाडु की लापरवाही बताया।
जहरीले रसायन का खतरा
डायइथाइलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक रसायन है, जो दवाओं में नहीं डाला जाना चाहिए। यह किडनी को नुकसान पहुंचाता है, खासकर बच्चों को। कंपनी ने सस्ते में प्रॉफिट के लिए इसे मिलाया। 3 अक्टूबर को तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर ने सैंपल टेस्ट किया और सिरप खराब निकला। मध्य प्रदेश ने 4 अक्टूबर को इसे बैन कर दिया। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, केरल और तमिलनाडु ने भी बैन लगाया। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से दवाओं की जांच करने को कहा।
मालिक की गिरफ्तारी
कंपनी मालिक रंगनाथन फरार हो गए थे। पुलिस ने 20,000 रुपये का इनाम रखा और विशेष जांच दल ने तमिलनाडु की फैक्ट्री पर छापा मारा। चेन्नई से रंगनाथन को पकड़ा गया। डॉक्टर प्रवीण सोनी भी गिरफ्तार हुए, जिन्होंने यह सिरप लिखा था। कंपनी 14 साल से सिरप बना रही थी और कई राज्यों में बेच रही थी।
सरकार का एक्शन
मध्य प्रदेश सरकार ने मृत बच्चों के परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया। इलाज का खर्च भी सरकार उठाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी। तमिलनाडु ने कंपनी का उत्पादन बंद किया। केंद्र ने विशेषज्ञ समिति बनाई जो मिलावट के कारण ढूंढेगी। गुजरात में दो और जहरीले सिरप मिले। डॉक्टरों को सलाह दी गई कि दो साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप न दें।
Keywords: Toxic Cough Syrup Tragedy, Madhya Pradesh Child Deaths, Pharmaceutical Owner Arrested, Kidney Failure Syrup Scandal
