बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल मची हुई है। मुजफ्फरपुर के कांटी हाई स्कूल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ऐसा बयान दिया, जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर वे चुनाव लड़ेंगे। ये बात उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच जोश भरने के लिए कही, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर एक बड़ा संकेत मान रहे हैं।
तेजस्वी ने अपने भाषण में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की एनडीए सरकारें सिर्फ जुमलों पर चल रही हैं। फिर उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत का जिक्र किया और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।
तेजस्वी ने खासतौर पर मुजफ्फरपुर, गायघाट, बोचहां और कांटी सीटों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि हर जगह वे खुद मैदान में उतरेंगे और लोगों से वोट मांगेंगे। ये ऐलान महागठबंधन की पार्टियों के बीच चल रही बातचीत के बीच आया है, जहां सीटों का बंटवारा अभी तय नहीं हुआ। RJD की तरफ से ये बयान कांग्रेस पर दबाव बनाने का तरीका लग रहा है, क्योंकि मुजफ्फरपुर जैसी सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि तेजस्वी का ये कदम गठबंधन में अपनी मजबूत पोजीशन दिखाने का प्रयास है। बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने हैं, और ये बयान सियासी समीकरणों को बदल सकता है।
पूर्णिया GMCH का चौंकाने वाला निरीक्षण
तेजस्वी का मुजफ्फरपुर दौरा ही नहीं, उन्होंने पूर्णिया में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। शनिवार रात को उन्होंने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) का अचानक दौरा किया। ये निरीक्षण प्रधानमंत्री मोदी के पूर्णिया दौरे से ठीक एक दिन पहले हुआ, जहां वे एयरपोर्ट का उद्घाटन करने वाले हैं। तेजस्वी ने अस्पताल की हालत देखकर एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया कि GMCH में ICU और ट्रॉमा सेंटर जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कार्डियोलॉजी विभाग पूरी तरह बंद पड़ा है।
अस्पताल में एक-एक बेड पर तीन-तीन मरीज लेटे मिले। बेडशीट्स हफ्तों से नहीं बदली गईं, और शौचालय इतने गंदे हैं कि इस्तेमाल ही नहीं हो सकते। तेजस्वी ने कहा कि यहां 80 प्रतिशत डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। नर्सों के 255 पदों में से सिर्फ 55 पर ही लोग तैनात हैं। कई विभाग बंद हैं, और मेडिकल इंटर्न्स को पिछले छह महीनों से सैलरी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इमारतें बनाने और उपकरण खरीदने में हजारों करोड़ खर्च करती है, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण असल सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं। नतीजा ये कि पूर्णिया में रोजाना करीब 10,000 मरीज निजी अस्पतालों पर निर्भर हो जाते हैं।
सियासी संदेश और स्वास्थ्य पर सवाल
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे CM नीतीश कुमार के साथ GMCH का दौरा करें। उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर ऐसा न हुआ तो नीतीश फिर कहेंगे, ‘2005 से पहले कुछ था जी?’ ये बयान स्वास्थ्य व्यवस्था की खराब हालत को उजागर करने के साथ-साथ एनडीए सरकार की 20 साल की नाकामी पर चोट करता है। राजनीतिक हलकों में इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो चुनाव से पहले जनता के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। तेजस्वी के इस दौरे ने कार्यकर्ताओं में उत्साह तो भरा ही है, साथ ही महागठबंधन के अंदर बहस को भी तेज कर दिया है। बिहार की सड़कों पर ये मुद्दे अब और गर्म होने वाले हैं।
महागठबंधन की चुनौतियां
महागठबंधन में RJD, कांग्रेस, वीआईपी और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं। सीट बंटवारे की बातचीत अप्रैल से चल रही है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। कांग्रेस 70 सीटें चाहती है, जबकि RJD कम से कम 150 पर दावा कर रही। तेजस्वी का 243 सीटों का ऐलान गठबंधन के लिए एक संकेत है कि RJD अकेले भी तैयार है। 2020 के चुनाव में महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं, लेकिन अब नई पार्टियों के जुड़ने से समीकरण जटिल हो गए। ये बयान कांग्रेस को मजबूर कर सकता है कि वो जल्दी फैसला ले। बिहार की जनता इन सियासी दांव-पेंच को करीब से देख रही है।
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