शिमला जिले की जिला अदालत ने संजौली मस्जिद मामले में गुरुवार को अहम् फैसला सुनाया। अदालत ने नगर निगम शिमला के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मस्जिद को ढहाने का निर्देश दिया गया था। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वक्फ बोर्ड मस्जिद का कोई वैध दस्तावेज या निर्माण के पेपर्स पेश नहीं कर सका। इसलिए नगर निगम की कार्रवाई को सही ठहराते हुए अदालत ने यह निर्णय लिया कि मस्जिद का ढांचा निर्माण नियमों का उल्लंघन है और इसे हटाना ही उचित है।
वक्फ बोर्ड के पास नहीं रहे पुख्ता सबूत
वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने अदालत में दलील दी कि मस्जिद लंबे समय से धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग हो रही है और इसे ढहाने से लोगों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचेगी। लेकिन अदालत ने कहा कि सिर्फ धार्मिक उपयोग का तर्क पर्याप्त नहीं है। इसके लिए भूमि और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज दिखाना जरूरी है। क्यूंकि वक्फ बोर्ड कोई प्रमाण नहीं पेश कर सका, अदालत ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। बता दें, इससे पहले नगर निगम अदालत भी कह चुकी थी कि मस्जिद का निर्माण बिना अनुमति और स्वीकृति के किया गया था।
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
मामले में स्थानीय लोगों के वकील जगत पाल ने इसे न्याय की जीत बताया। उनका कहना है कि संजौली मस्जिद पूरी तरह अवैध थी और अब जिला अदालत ने इसे भी मान्यता दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नगर निगम जल्द अवैध ढांचे को गिराने की कार्रवाई करेगा ताकि क्षेत्र में तनाव न बढ़े। नगर निगम प्रशासन ने भी कहा है कि अदालत के आदेश की कॉपी मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। इससे पहले नगर निगम ने मस्जिद की तीन मंजिलें ढहाने का आदेश 5 अक्टूबर 2024 को दिया था और बाद में 3 मई 2025 को शेष दो मंजिलें गिराने का निर्णय लिया गया था।
कैसे उठा ये मसला?
संजौली मस्जिद विवाद की शुरुआत शिमला के मतियाणा में युवकों की पिटाई की घटना के बाद हुई थी। इसके बाद क्षेत्र में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया और मस्जिद को अवैध बताते हुए जांच की मांग की। मस्जिद कमेटी ने 11 सितंबर 2024 को नगर निगम के सामने अवैध हिस्से को स्वयं हटाने की पेशकश की थी, लेकिन मामला अदालत तक पहुंच गया। अब जिला अदालत के हालिया आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नगर निगम जल्द ही मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने की कार्रवाई शुरू करेगा।
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