वॉशिंगटन: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका ने भारत को अपनी रणनीति का अहम साझेदार बताया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है, जिसमें नौसैनिक सुरक्षा, खुफिया साझाकरण और संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल Samuel Paparo ने कहा कि भारत के साथ संबंध वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं और यह साझेदारी अब अमेरिका के सबसे करीबी सैन्य सहयोगों में से एक बनती जा रही है।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग अब समुद्री सुरक्षा, इंटेलिजेंस समन्वय और अंडरवॉटर डोमेन अवेयरनेस तक फैल चुका है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हैं। साथ ही भारत द्वारा अमेरिकी MQ-9B ड्रोन खरीदने की योजना का भी जिक्र किया गया, जो लंबी दूरी की निगरानी और रणनीतिक मिशनों के लिए उपयोगी हैं। इसके अलावा, क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के तहत होने वाले Malabar Naval Exercise जैसे संयुक्त अभ्यासों से चारों देशों के बीच तालमेल और सैन्य तैयारी मजबूत हो रही है।
एडमिरल पापारो ने भारत को दक्षिण एशिया में स्थिरता का केंद्र बताते हुए कहा कि भारत न केवल अपने क्षेत्र में संतुलन बनाए हुए है, बल्कि हिंद महासागर में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। उन्होंने श्रीलंका और मॉरीशस के साथ भारत के समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि ये कदम समुद्री सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए हैं।
वहीं, अमेरिका ने चीन की सैन्य गतिविधियों और रूस तथा उत्तर कोरिया के साथ उसके बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई है। अधिकारियों का कहना है कि ये घटनाक्रम क्षेत्र में नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद, अमेरिका अपने सहयोगी देशों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है। इस दौरान अमेरिकी सांसद Adam Smith ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत साझेदारी जरूरी है और अमेरिका को अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहना होगा।
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