मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार वहां की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 9 मार्च को राज्यसभा में बताया कि सरकार विशेष रूप से क्रूड ऑयल की आपूर्ति और क्षेत्र में बिगड़ते हालात पर ध्यान दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मिडिल ईस्ट के विवादों का हल केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जा सकता है। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि मिडिल ईस्ट में परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, इसलिए भारत हर घटनाक्रम पर सतर्क नजर रखे हुए है, क्योंकि इनका असर वैश्विक स्तर पर भी हो सकता है।
जयशंकर ने कहा कि भारत हालात पर बेहद करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है और तनाव स्पष्ट रूप से बढ़ा है। इस स्थिति में भारत सरकार वहां की परिस्थितियों का लगातार विश्लेषण और मूल्यांकन कर रही है।
जयशंकर ने राज्यसभा में मिडिल ईस्ट पर भारत का स्पष्ट रुख बताया
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वहां के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियों पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने राज्यसभा में बताया कि बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और व्यापारिक कामकाज भी सुचारू रूप से नहीं चल पा रहे हैं। भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली हमेशा मानती है कि किसी भी विवाद का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उनका कहना था कि युद्ध या सैन्य टकराव लंबे समय तक समाधान नहीं दे सकते, इसलिए देशों को संवाद के माध्यम से ही समस्याओं को हल करना चाहिए।
जयशंकर ने मिडिल ईस्ट तनाव का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पर जताई चिंता
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार इस बात को लेकर सतर्क है कि मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार क्रूड ऑयल की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी बड़े बदलाव के समय समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
मिडिल ईस्ट में भारत के गहरे आर्थिक और मानवीय संबंध
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि मिडिल ईस्ट के साथ भारत के संबंध आर्थिक और मानवीय दोनों ही रूपों में गहरे हैं। इस क्षेत्र के कई देशों के साथ भारत का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश का मजबूत तालमेल है, इसलिए वहां की स्थिरता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं—लगभग एक करोड़ लोग। इसलिए क्षेत्र की सुरक्षा और शांति भारत की प्राथमिकता है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत चाहता है कि मिडिल ईस्ट में स्थिरता बनी रहे, ताकि वहां रहने वाले भारतीय सुरक्षित रहें और सामान्य जीवन-संगठन सुचारू रूप से चलता रहे।
संघर्ष में हताहतों पर जयशंकर ने जताया शोक
जयशंकर ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इसे बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि पूरा संसद इस नुकसान पर शोक प्रकट करता है। विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर स्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही भारत अपने फैसले लेता है।]
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