संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है। इसी बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि भारत के लिए किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन केंद्र सरकार नहीं चाहती कि इस संकट का असर देश की आम जनता पर पड़े।
इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत दी है। सरकार ने दोनों ईंधनों पर 10 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की है। इसके तहत पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा दी गई है, जिसके बाद यह घटकर लगभग 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इस कदम से आम जनता को सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने इस फैसले की जानकारी अधिसूचना संख्या 05/2026-केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के जरिए दी है। जी.एस.आर. 204(ई) के तहत, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 और वित्त अधिनियम, 2002 की धाराओं के अंतर्गत शक्तियों का उपयोग करते हुए यह संशोधन किया गया है। इसके अनुसार, अधिसूचना 05/2019-केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में बदलाव करते हुए तालिका में संशोधन किया गया है, जहां पहले की प्रविष्टियों को बदलकर “3 रुपये प्रति लीटर” किया गया है, जबकि कुछ प्रविष्टियों को “शून्य (Nil)” कर दिया गया है।
इसके अलावा अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह नियम निर्यात के लिए भेजे जाने वाले माल पर लागू नहीं होगा। साथ ही यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
इस पूरे मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके कारण दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतें 30% से 50% तक बढ़ी हैं, जबकि उत्तर अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीका में लगभग 50% तक वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे या तो अन्य देशों की तरह आम जनता पर बोझ डालते हुए कीमतें बढ़ा दी जाएं, या फिर खुद वित्तीय दबाव झेलते हुए नागरिकों को राहत दी जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दूसरा विकल्प चुना और आम जनता को राहत देने के लिए खुद वित्तीय बोझ उठाने का फैसला किया।
सरकार ने अपने टैक्स राजस्व में कटौती की है ताकि तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान को कम किया जा सके। वर्तमान में पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी को देखते हुए एक्सपोर्ट टैक्स भी लगाया गया है, जिससे अब विदेशी देशों को ईंधन निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को टैक्स देना होगा।
सरकार के इस फैसले को समय पर लिया गया, साहसिक और दूरदर्शी कदम बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक संकट के बीच देश की जनता को राहत देना है।
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