सोमवार को लोकसभा में भारत का नया आयकर विधेयक 2025 पारित हो गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक को दोबारा पेश किया, जिसमें लोकसभा की चयन समिति की अहम सिफारिशें शामिल की गईं। इससे पहले, पुराने मसौदे को वापस ले लिया गया था ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके। जानकारी हो कि, आज सिर्फ आयकर विधेयक ही नहीं, बल्कि कराधान कानून (संशोधन) विधेयक भी पारित हुआ है, जिसका उद्देश्य एकीकृत पेंशन योजना के ग्राहकों को टैक्स छूट देना है। विपक्ष के विरोध के बावजूद, दोनों विधेयक बिना बहस के ध्वनि मत से पास हो गए।
क्या है नया आयकर विधेयक 2025?
नया कानून आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। इसमें 536 धाराएं और 16 अनुसूचियां शामिल हैं, जिन्हें व्यवस्थित तरीके से लिखा गया है। सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब “पिछला वर्ष” और “आकलन वर्ष” की जगह केवल “कर वर्ष” की अवधारणा होगी। गैरजरूरी प्रावधान हटाकर मुकदमों की संख्या कम करने की कोशिश की गई है, और CBDT को डिजिटल युग के अनुरूप नियम बनाने के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं।
चयन समिति की 285+ सिफारिशें शामिल
चयन समिति ने 4,500 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट दी, जिसमें 285 से अधिक सुझाव थे। इनमें से लगभग सभी को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं – लेट रिटर्न भरने वालों को भी टैक्स रिफंड का अधिकार मिलेगा। इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड पर ₹80 लाख की कटौती फिर से लागू होगी। NIL-TDS प्रमाणपत्र की सुविधा, खाली मकान पर काल्पनिक किराए पर टैक्स हटाना, हाउस प्रॉपर्टी पर नगरपालिका कर घटाने के बाद 30% मानक कटौती और ब्याज छूट, MSME की परिभाषा में सुधार, और भाषा और मसौदे को सरल बनाना जैसी चीजें इसमें शामिल हैं।
अब यहां सवाल ये उठता है कि, आखिर ये विधेयक खास क्यों है? तो इसका कारण ये है कि पुराना आयकर अधिनियम 1961 अक्सर जटिल भाषा और लंबी प्रक्रियाओं के कारण आम लोगों के लिए मुश्किल साबित होता था, जबकि नया विधेयक सरल, स्पष्ट और आधुनिक जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और कम विवाद वाला बनाना है।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
विशेषज्ञों की मानें तो विदेशी पेंशन फंड और संप्रभु फंड के निवेश पर कर लाभ के प्रावधान मौजूदा कानून जैसे ही हैं, लेकिन उन्हें ज्यादा व्यवस्थित और संक्षिप्त तरीके से तैयार किया गया है। वहीं, ध्रुवा एडवाइजर्स के CEO दिनेश कनाबर का कहना है कि LLPs पर वैकल्पिक न्यूनतम कर हटाना, चैरिटेबल ट्रस्ट पर सख्ती खत्म करना और ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों में ढील देना जैसे बदलाव बेहद सकारात्मक हैं।कह सकते हैं कि, नया आयकर विधेयक 2025 न केवल कानून की भाषा को आसान बनाता है, बल्कि करदाताओं के लिए नियमों का पालन भी सरल करता है। ये बदलाव भारत की टैक्स प्रणाली को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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