झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ‘इंडिया अलायंस’ को एक बड़ा झटका दिया है। झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेस वार्ता में साफ़ किया है कि JMM न केवल बिहार विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लेगी, बल्कि महागठबंधन के किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार-प्रसार भी नहीं करेगी। इस फैसले ने न केवल बिहार में विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि झारखंड में भी JMM-कांग्रेस-राजद गठबंधन के भविष्य पर गंभीर बादल छा गए हैं।
गठबंधन धर्म पर अन्याय का आरोप
JMM के इस कड़े निर्णय का कारण कांग्रेस और राजद द्वारा ‘गठबंधन धर्म’ का पालन न करना बताया गया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने आरोप लगाया कि बिहार में सीट बंटवारे और अन्य व्यवस्थाओं में JMM को लगातार उलझा कर रखा गया और अंत में ‘राजनीतिक धूर्तता’ के कारण पार्टी को चुनाव न लड़ने का फैसला लेना पड़ा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार झारखंड में JMM ने बड़ा भाई होने की भूमिका निभाते हुए कांग्रेस और राजद को सहयोग दिया और सीटें प्रदान कीं, उसी प्रकार बिहार में झामुमो के साथ ‘अन्याय’ हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर भी निष्क्रियता का आरोप लगाया कि उसने इस पूरे विवाद में JMM के पक्ष में कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं लिया और न ही मध्यस्थता की कोई पहल की।
पलटवार और भविष्य की समीक्षा
इससे पहले, 18 अक्टूबर को, JMM ने 6 सीमावर्ती विधानसभा सीटों—चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती—पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन अब पार्टी ने खुद को पूरी तरह से चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर लिया है।
इस घटनाक्रम पर बीजेपी ने तुरंत तंज कसते हुए JMM को ‘भाग JMM भाग’ की याद दिलाई और गठबंधन पर स्टैंड बदलकर ‘बेशर्मी की नई मिसाल’ कायम करने का आरोप लगाया।
विश्लेषकों का मानना है कि JMM की यह नाराजगी और बिहार चुनाव से दूरी ‘इंडिया अलायंस’ के लिए झारखंड में बड़ी चुनौती पैदा कर सकती है। JMM ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह झारखंड में गठबंधन की सियासी स्थिति और कांग्रेस-राजद के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगी। यदि यह गतिरोध नहीं सुलझा, तो झारखंड में भी गठबंधन के टूटने की प्रबल संभावना है।
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