इंदौर की स्वच्छता पर दूषित पानी की वजह से दाग लग गया है। दूषित पानी के कारण अब तक 13 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार हैं। इस घटना के बाद सीएम मोहन यादव की सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। वहीं, सरकार के कुछ मंत्रियों के बयान और रवैये सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों के बाद इसके कारणों की गंभीरता से जांच की जा रही थी। प्रशासन का कहना है कि दूषित पानी से मौतों की संख्या सीमित है और जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनकी अलग-अलग वजहें हैं। बावजूद इसके, अब जाकर पानी के दूषित होने की असली वजह सामने आ गई है।
इस कारण दूषित हुआ पानी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी में सीवरेज का पानी मिल गया था, जिससे पानी दूषित हो गया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसनी ने बताया कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब में पानी के नमूनों की जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए। इसी दूषित पानी को पीने से लोग बीमार पड़े और कुछ लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पाइपलाइन में रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ।
सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश
घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एम.वाय. अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हाल जाना और उच्चस्तरीय बैठक कर चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी मरीजों को सर्वोत्तम और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
घटना सामने आने के बाद क्षेत्र के 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य जांच कराई गई। इस दौरान 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 50 मरीज उपचार के बाद डिस्चार्ज हो चुके हैं। शेष 162 मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शासकीय व निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की तत्परता को सराहनीय बताया गया है। सभी के समन्वित प्रयासों से इस आपात स्थिति पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है।
Keywords: Indore Water Crisis, Indore Water Quality, Indore Water Tragedy, CM Mohan Yadav

