असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के बीच शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई मुलाकात और सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें चर्चा में आ गई हैं। 12 मई को हुए समारोह में सरमा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बाद में सरमा ने X पर तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह शुभेंदु अधिकारी को गले लगाते नजर आए। सोशल मीडिया पर इसे सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर बयान और तंज से बढ़ी चर्चा
तस्वीरों के साथ हिमंत बिस्वा सरमा ने लिखा “बुरे दिन… (आप जानते हैं कौन)” और शुभेंदु अधिकारी को टैग किया। इसके जवाब में अधिकारी ने भी हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि इसका अंदाजा लगाने के लिए किसी इनाम की जरूरत नहीं है। दोनों नेताओं की यह बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। हालांकि किसी ने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन इसे बांग्लादेश सीमा से होने वाली अवैध घुसपैठ से जोड़कर देखा जा रहा है। असम और पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश से लगती है, जहां यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।
Bad days for….(You know who)@SuvenduWB pic.twitter.com/1NpMmIBwkE
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 12, 2026
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा के एक रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिससे ऑनलाइन राजनीतिक बहस तेज हो गई। अधिकारी ने जवाब में लिखा कि इसका अंदाजा लगाने के लिए किसी इनाम की जरूरत नहीं है। दोनों नेताओं ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे बांग्लादेश से अवैध प्रवासन और असम व पश्चिम बंगाल में इसके कथित प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
No Prizes for Guessing, I guess 😄@himantabiswa https://t.co/ZG87b90tkA
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) May 12, 2026
घुसपैठ मुद्दे पर नेताओं की सक्रियता और सोशल मीडिया प्रतिक्रिया
हिमंत बिस्वा सरमा लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर अवैध घुसपैठ को असम की जनसंख्या और सुरक्षा के लिए चुनौती बताते रहे हैं। वहीं शुभेंदु अधिकारी भी पश्चिम बंगाल में इसी मुद्दे को लगातार उठाते आए हैं। दोनों नेताओं का कहना है कि सीमा पर कड़ी निगरानी और अवैध प्रवासियों की पहचान जरूरी है। वायरल पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोगों ने इसे समर्थन और कुछ ने राजनीतिक संदेश के रूप में देखा। दोनों नेताओं की नजदीकी को पूर्वी भारत में भाजपा की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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