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हरियाणा के पंचकूला में 18 लाख के रावण का भव्य दहन, पुतला निर्माता उस्मान मुहम्मद ने बताए खास राज

पंचकूला में इस विजयादशमी 180 फीट ऊंचे रावण, 100 फीट मेघनाद-कुंभकर्ण के पुतले जलेंगे। लाखों खर्च, महीनों मेहनत से तैयार भव्य आयोजन।

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हरियाणा के पंचकूला में इस साल विजयादशमी के अवसर पर इतिहास रचने की तैयारी हो चुकी है। यहां 180 फीट ऊंचा रावण का पुतला जलाया जाएगा, जो त्रि-नगरीय क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली) का सबसे ऊंचा पुतला होगा। इसके साथ 100 फीट ऊंचे मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी खड़े किए जा रहे हैं। इस विशालकाय रावण के निर्माण में तकरीबन 4500 बांस, दो लाख रुपये का कपड़ा और अन्य सामग्रियां लगी हैं। इसकी लागत करीब 18 लाख रुपये बताई जा रही है। पुतले बनाने वाले कारीगर उस्मान मुहम्मद कुरैशी और उनकी टीम ने कई महीनों की मेहनत से इसे तैयार किया है और अब वे भी इस ऐतिहासिक क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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मेहनत और कला का अद्भुत संगम

पुतला निर्माण केवल तकनीकी काम नहीं है, बल्कि इसमें कला और धैर्य का भी गहरा योगदान होता है। उस्मान कुरैशी ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर काम का ठेका लिया और अपने परिवार के आठ सदस्यों और आठ अन्य कारीगरों के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत की। उनका कहना है कि यह काम केवल रावण के ढांचे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे आकर्षक और भव्य बनाने के लिए रंगीन कपड़े, सजावट और फिनिशिंग पर भी खास ध्यान दिया गया। इस प्रयास के पीछे सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था से जुड़ाव भी बड़ी वजह है।

दशहरा और रावण दहन का महत्व

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। रामायण की कथा के अनुसार जब भगवान राम ने रावण का वध किया, तो उस क्षण को समाज में धर्म, सत्य और न्याय की जीत के रूप में देखा गया। तभी से रावण का पुतला दहन इस पर्व का अहम हिस्सा बन गया। हर साल लाखों लोग इसे देखने के लिए मैदानों में जुटते हैं। रावण दहन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह संदेश भी देता है कि चाहे बुराई कितनी ही बड़ी क्यों न हो, अंततः अच्छाई की ही जीत होती है।

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भव्य आयोजन से बढ़ी लोगों की उत्सुकता

इस साल पंचकूला में तैयार किए गए विशालकाय रावण ने पहले से ही लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी लोग इस आयोजन को देखने आने वाले हैं। प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है कि रावण दहन के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही हो, लेकिन इस आयोजन का पैमाना निश्चित रूप से लोगों को आकर्षित कर रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बार देश का सबसे महंगा और भव्य रावण किस जगह पर खड़ा होगा। फिलहाल पंचकूला का यह आयोजन चर्चा का केंद्र बना हुआ है और विजयादशमी पर लोगों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होने वाला है।

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