मनरेगा की जगह लाए गए जी राम जी विधेयक को आखिरकार लोकसभा में पारित कर दिया गया। हालांकि, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम से जुड़े इस विधेयक के पारित होने के दौरान लोकसभा में जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सदस्य इस विधेयक को समिति के पास भेजने की मांग कर रहे थे, लेकिन इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विधेयक पर पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इसके बाद विधेयक की प्रति फाड़े जाने की घटना सामने आई। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहीं, बिल की प्रति फाड़े जाने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नाराज नजर आए।
कांग्रेस ने कही ये बात
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, “हमारा मुख्य विरोध यह है कि इस योजना के तहत 60-40 प्रतिशत का अनुपात कर दिया गया है, जिसमें अब 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकारों को देनी पड़ेगी, जबकि पहले इस योजना के तहत 90 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती थी। जब कांग्रेस 2006 में यह योजना लाई थी, तो हमारा उद्देश्य गरीब राज्यों के लोगों को पलायन से रोकना था। अगर कोई राज्य गरीब है, तो वह 40 प्रतिशत पैसा कहां से लाएगा? सरकार षड्यंत्र के तहत इस योजना को खत्म करना चाहती है। 60-40 के अनुपात के कारण गरीब राज्यों में यह योजना ही बंद हो जाएगी।”
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महात्मा गांधी, जिन्होंने भारत की आज़ादी के संग्राम का नेतृत्व किया, उनके नाम पर चल रही एक सफल योजना को विचारधारात्मक और ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण बदलना इससे बड़ा अपराध नहीं हो सकता। इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है। अभी भी समय है। विधेयक राज्यसभा में जाएगा, वहां इस पर विचार कर योजना का नाम मनरेगा ही रखा जाना चाहिए।”
बीजेपी बचाव में उतरी
भाजपा सांसद अरुण गोविल ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 पर कहा, “विपक्ष ने बहुत हंगामा किया। मैंने इस सदन में पहले कभी ऐसा नहीं देखा। पिछले एक से डेढ़ साल में तो ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ था। बिल पास हो गया है और यह एक अच्छा विधेयक है, जो ग्रामीण विकास में बड़ा योगदान देगा। मैं जब से सदन में आया हूं, तब से पहली बार देखा है कि विपक्ष को महात्मा गांधी का नाम याद आया हो। इससे पहले तो वे गांधी जी का नाम भी नहीं लेते थे।”
भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “आज कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में किस तरह का आचरण किया? 10 घंटे तक रात देर तक चर्चा हुई, सभी को अपनी बात रखने का मौका मिला, लेकिन जब शिवराज सिंह चौहान जवाब देने आए, तब बिल को फाड़ा गया। क्या कांग्रेस पार्टी अब अराजक पार्टी बन गई है? वे गांधी जी का नाम लेना बंद करें। देश के विकास में चाहे स्वच्छ भारत अभियान हो, गरीबों के लिए आवास योजना हो या पेयजल योजना—जो योजनाएं ज़मीन पर उतरी हैं, उनमें गांधी जी बसते हैं, सिर्फ नाम में नहीं। आज विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी के इस आचरण से मुझे बहुत पीड़ा हुई है। क्या उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास नहीं है?
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