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गाम्बिया से उज़्बेकिस्तान तक: भारत के सिरप में ज़हर की गड़बड़ी कहाँ से आई, क्या है फैक्टरी की चूक?

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोल्डरिफ सिरप से बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया। डायइथाइलीन ग्लाइकॉल की मौजूदगी से खतरा। सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

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हाल ही में, भारत के मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्यों से एक बहुत ही दुखद खबर आई जिसने सबको चौंका दिया। कई मासूम बच्चों की मौत हो गई, और कई दर्जन बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। इसका कारण निकला एक आम कफ सिरप, जिसका नाम कोल्डरिफ है और जिसे तमिलनाडु की एसरेसन फार्मा कंपनी ने बनाया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सिरप की जाँच की, जिसमें एक बहुत ही खतरनाक सच सामने आया। जाँच में पता चला कि इस सिरप में डायइथाइलीन ग्लाइकॉल (DEG) नाम का एक ज़हरीला रसायन बहुत ज्यादा मात्रा में मिला हुआ था, जिसकी वजह से बच्चों की किडनी खराब हो गई और उनकी जान चली गई। अभी तक यह समस्या सिरप के कुछ ही बैचों तक सीमित लगती है, लेकिन यह मामला बहुत गंभीर है और दवा की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।

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दवा में ज़हर कैसे आया और यह कितना खतरनाक है?

डायइथाइलीन ग्लाइकॉल (DEG) दरअसल एक औद्योगिक रसायन होता है, जिसका उपयोग कार के एंटीफ्रीज, ब्रेक फ्लूइड और प्लास्टिक जैसी चीजें बनाने में किया जाता है। दवाओं या खाने पीने की चीजों में इसका इस्तेमाल करना पूरी तरह से मना है। जब यह रसायन कफ सिरप में मिल जाता है, तो यह शरीर में जाकर ऐसे ज़हरीले पदार्थ बनाता है जो सीधे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। बच्चों पर इसका असर और भी ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी किडनी बड़ों के मुकाबले कमजोर होती है। भारत में दवा बनाने के नियम कहते हैं कि डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से कम होनी चाहिए, मगर कोल्डरिफ के जिस बैच एसआर-13 की जाँच हुई, उसमें तो यह 48.6 प्रतिशत तक पाया गया। इससे पहले भी 2022 में गाम्बिया और 2023 में उज़्बेकिस्तान में भारतीय सिरप में इसी ज़हर से बच्चों की मौतें हुई थीं।

सिरप में ज़हरीला रसायन मिलने की मुख्य वजह क्या है?

कफ सिरप बनाते समय उसमें दवा के साथ ही कई चीजें मिलाई जाती हैं, जैसे स्वाद के लिए चीनी और घोलक (Solvents) के तौर पर ग्लिसरीन या प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल। ज़हर तब मिल जाता है, जब दवा बनाने वाली कंपनी सस्ते रसायनों का इस्तेमाल करने लगती है। DEG सस्ता और चिपचिपा होता है, जो दिखने में ग्लिसरीन जैसा लगता है, लेकिन यह बहुत ज़हरीला होता है। अगर फैक्टरी में सही तरीके से जाँच न हो या कच्चे माल की सप्लाई चेन में कोई लापरवाही हो, तो यह ज़हर गलती से सिरप में मिल जाता है। यह इस बात से साफ होता है कि कोल्डरिफ के कुछ सैंपल तो ठीक निकले, यानी यह खराबी केवल कुछ ही बैचों तक सीमित रही।

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सरकार ने फौरन कौन से बड़े कदम उठाए हैं?

इस बड़ी और दुखद घटना के सामने आते ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई की। कोल्डरिफ के सभी खराब बैच की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों में इसकी बिक्री फौरन बंद कर दी गई है। इसके अलावा, सभी राज्यों को आदेश दिया गया है कि वे अपने यहाँ बिक रहे सिरपों की जाँच करें। सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई है जो इस समस्या की जड़ तक जाएगी और दवा के नियमों को और भी सख्त बनाएगी। इस मामले में, ज्यादातर बच्चों को सिरप देने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है और एसरेसन फार्मा कंपनी पर केस दर्ज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट भी इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बच्चों को कफ सिरप देते समय बहुत सावधानी बरतना जरूरी है। हमेशा डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को कोई भी कफ सिरप न दें। सिरप खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और पैकिंग को ध्यान से देखें। अगर आपको सिरप की रंगत या गंध पर थोड़ा भी संदेह हो, तो उसका इस्तेमाल बिल्कुल न करें। यह भी सुनिश्चित करें कि जो सिरप आप दे रहे हैं, उसमें दवा के रूप में केवल एक मुख्य दवा ही हो, कई तरह की दवाएँ नहीं। सिरप की सही खुराक बच्चे की उम्र और वजन के हिसाब से ही दें। अगर बच्चे के लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Keywords: Cough Syrup Poisoning, Diethylene Glycol, India Health Crisis, Coldrif Controversy, Child Safety

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