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वाराणसी में पूर्व ओलंपियन मोहम्मद शाहिद के घर पर चला बुलडोजर, सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई

वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण के तहत पूर्व हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के घर पर चला बुलडोजर, परिवार ने मुआवजे की लगाई गुहार, प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने की बात कही।

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वाराणसी के संदहा इलाके में इन दिनों बड़े पैमाने पर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत पुलिस लाइन से कचहरी तक जाने वाली सड़क के किनारे बसे कई मकानों को प्रशासन ने ढहा दिया। कुल मिलाकर 13 मकानों पर बुलडोजर चला, जिनमें भारत के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मोहम्मद शाहिद का घर भी शामिल था। यह वही मोहम्मद शाहिद हैं जिन्हें 1980 के मास्को ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के लिए आज भी याद किया जाता है। परिजनों का कहना है कि सरकार ने उनकी उपलब्धियों का सम्मान तो खूब किया, लेकिन अब जब मकान टूट गया तो उन्हें कहीं जाने की जगह भी नहीं छोड़ी।

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परिवार ने की मुआवजे की मांग

कार्रवाई के दौरान शाहिद का परिवार पूरी तरह भावुक दिखाई दिया। उनकी भाभी नाज़नीन ने कहा कि वे मुआवजे और पुनर्वास की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन अब तक उन्हें स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि जिस घर में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल बिताए, उसे बिना ठोस व्यवस्था किए गिरा दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने भी इस घटना को और चर्चित बना दिया, जिसमें एक बुजुर्ग प्रशासनिक अधिकारियों से हाथ जोड़कर मोहलत मांगते नजर आए। परिवार का कहना है कि वे विकास कार्य के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पुनर्वास और न्यायपूर्ण मुआवजे के बिना इस तरह की कार्रवाई उन्हें बेघर कर रही है।

प्रशासन ने रखा अपना पक्ष

प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी रूप से की गई है और जिन परिवारों को मुआवजा देना था, उन्हें पहले ही भुगतान किया जा चुका है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शाहिद के परिवार में नौ हिस्सेदार हैं, जिनमें से छह को मुआवजा दिया गया है। बाकी तीन हिस्सों पर अदालत से स्टे ऑर्डर होने के कारण वहां कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन का यह भी दावा है कि कई बार दस्तावेज़ीकरण की मांग की गई, लेकिन परिवार की ओर से कागज़ात समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बावजूद, प्रभावित परिवार का दर्द और शिकायतें कम नहीं हो पा रही हैं।

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विकास बनाम मानवीय पहलू

सड़क चौड़ीकरण को वाराणसी के लिए एक बड़े विकास प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत 59 मकानों को तीन चरणों में तोड़े जाने की योजना है। निश्चित रूप से शहर की सड़कों को चौड़ा करना यातायात की समस्या का हल निकाल सकता है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या विकास की कीमत लोगों के आशियाने उजाड़ कर चुकाई जानी चाहिए? खासकर तब, जब मामला ऐसे खिलाड़ी के परिवार से जुड़ा हो जिसने देश का नाम रौशन किया हो। मोहम्मद शाहिद के घर पर चली यह कार्रवाई सिर्फ एक परिवार का निजी दुख नहीं, बल्कि समाज के लिए भी यह सोचने का विषय है कि विकास और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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