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उपराष्ट्रपति को लेकर बीजेपी का राधाकृष्णन पर दांव, उद्धव से लेकर स्टालिन तक की क्यों बढ़ी टेंशन?

उपराष्ट्रपति को लेकर बीजेपी की तरफ से महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल पर दांव लगाए जाने से उद्धव ठाकरे से लेकर MK स्टालिन तक की बढ़ गई है, उपराष्ट्रपति के चुनाव में 4 बार से सेंधमारी होती आ रही है।

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उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई शिकार कर दिया है। बीजेपी के इस दांव को एक तरफ अपने समीकरण को साधने तो दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक में सेंधमारी की रणनीति मानी जा रही है।

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बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राधाकृष्णन के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि विपक्ष के साथ भी बातचीत कर उनके नाम पर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेंगे। NDA की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राधाकृष्णन को उतारना मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

‘राधाकृष्णन’ की उम्मीदवारी पर विपक्ष

एनडीए उम्मीदवार के तौर पर सीपी राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगी है, लेकिन विपक्ष ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस बीच सांसद और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर कहा, ‘I.N.D.I.A. के नेताओं ने इस मामले पर कुछ चर्चा की है और मुझे उम्मीद है कि आम सहमति बन जाएगी और हम बहुत जल्द ही चर्चा को सार्वजनिक करेंगे।’
स्टालिन के साथ उद्धव की कशमकश

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पीएम मोदी का हर एक फैसला राजनीतिक लिहाज से काफ़ी अहम होता है। ऐसे में इसे राधाकृष्णन के चयन के पीछे बीजेपी की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। सीपी राधाकृष्णन दक्षिण भारत के तमिलनाडु से आते हैं और फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। इस तरह से बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर DMK और AIADMK में सेंधमारी करने के साथ-साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना को भी कशमकश में डाल दिया है।

राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव में होती रही सेंधमारी

देश में राष्ट्रपति चुनाव हो या फिर उपराष्ट्रपति का चुनाव, अक्सर देखा गया है कि सत्तापक्ष विपक्षी खेमे में सेंधमारी करती आ रही है। चाहे कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए का दौर रहा हो या फिर मौजूदा बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए।

UPA ने 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को उम्मीदवार बनाया था, उस समय NDA से भैरों सिंह शेखावत चुनाव लड़े थे। प्रतिभा पाटिल महाराष्ट्र की होने के नाते शिवसेना ने एनडीए गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी यूपीए को वोट किया था। इसी तरह 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए ने प्रणब मुखर्जी को जब उम्मीदवार बनाया था, तब भी एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना और JDU ने यूपीए को वोट किया था।

वहीं, 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में NDA ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था, तब जेडीयू ने विपक्ष में रहते हुए भी उनका समर्थन किया था क्योंकि वे बिहार के राज्यपाल थे। इसके बाद 2022 में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए ने जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया था तो उस समय कांग्रेस की तरफ़ से मार्गरेट अल्वा विपक्षी उम्मीदवार थीं। इसके बाद भी TMC ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था जबकि धनखड़ के साथ ममता की अदावत जगजाहिर रही है।

बीजेपी ने विपक्षी खेमे की बढ़ाई टेंशन

तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन एनडीए के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जो फिलहाल महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एमके स्टालिन की DMK कशमकश की स्थिति में फंस गए हैं। स्टालिन और उद्धव दोनों ही विपक्षी खेमे में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सीपी राधाकृष्णन का नाम आगे बढ़ाकर इन दोनों नेताओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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