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pitru paksha 2025: भूलकर भी न करें इन 10 चीजों का दान, जानें सही नियम

पितृ पक्ष में दान का महत्व है, लेकिन कुछ वस्तुएं ऐसी हैं जिनका दान अशुभ माना जाता है। जानें किन चीजों से बचना चाहिए और क्या करना है जरूरी।

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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) को अपने पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष समय माना गया है। 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर, सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। मान्यता है कि इन 15 दिनों में पितरों के नाम से तर्पण और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। हालांकि, धार्मिक शास्त्रों में कुछ वस्तुओं को पितृ पक्ष में दान करने से मना किया गया है। इन नियमों का पालन न करने पर पितृ नाराज़ हो सकते हैं और अनचाहे दोष भी लग सकते हैं।

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पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें इन वस्तुओं का दान

पितृ पक्ष में दान करते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि दान केवल शुद्ध, पवित्र और शुभ वस्तुओं का ही किया जाए। आइए जानते हैं किन चीजों को कभी दान नहीं करना चाहिए:

  • लोहे के बर्तन – इन्हें दान करना अशुभ माना गया है। इसके स्थान पर पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन दान करें।
  • चमड़े की वस्तुएं – चमड़े का उपयोग इस अवधि में वर्जित है। यह पितरों के प्रति अनादर माना जाता है।
  • पुराने कपड़े – पितृ पक्ष में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को केवल नए कपड़े ही दान करें।
  • काले रंग के कपड़े – धार्मिक कार्य में काले रंग का उपयोग अशुभ होता है, इसलिए इसका दान नहीं करना चाहिए।
  • तेल – विशेषकर सरसों का तेल श्राद्ध में दान करने से मना किया गया है।
  • बासी भोजन – पितरों को केवल ताज़ा और शुद्ध भोजन ही अर्पित करें, बचा हुआ खाना न चढ़ाएं।
  • ज़मीन के नीचे उगने वाली सब्जियां – जैसे गाजर, मूली और शलजम दान करने से बचें।
  • नमक – श्राद्ध पक्ष में नमक का दान अशुभ फल देने वाला माना जाता है।
  • मसूर की दाल – इसे दान करने से ग्रह दोष उत्पन्न हो सकता है और पितृ अप्रसन्न हो सकते हैं।
  • प्लास्टिक की वस्तुएं – पितृ पक्ष में प्लास्टिक की चीजें दान करना पूरी तरह वर्जित है।

पितृ पक्ष का असली उद्देश्य अपने पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करना है। इसलिए इन दिनों ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गौ सेवा में योगदान करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही, प्रतिदिन तर्पण और पिंडदान से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए सही नियमों का पालन करते हुए श्राद्ध कर्म करना हर व्यक्ति का कर्तव्य माना गया है।

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