भारत में करवा चौथ का त्योहार प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ का यह पवित्र पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व दोनों ही बहुत गहरा है।
करवा चौथ कब है?
पंचांग के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत आरंभ करती हैं और चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं।
करवा चौथ के विशेष योग
इस बार करवा चौथ के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो व्रत के महत्व को और बढ़ा देते हैं। सिद्धि योग और शिववास योग कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र का संयोग
साथ ही बव, बालव और तैतिल योग का निर्माण
ये योग इस दिन को अत्यंत शुभ और फलदायी बनाते हैं।
- व्रत, पूजा और चांद दर्शन का समय
- सरगी का समय: सुबह 6:19 बजे से पहले
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक
- चंद्र दर्शन का समय: रात 8:13 बजे
- व्रत समाप्ति (पारण): चंद्र दर्शन के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर
करवा चौथ की पूजा विधि
- स्नान कर पूजा स्थल तैयार करें। लकड़ी की चौकी पर करवा माता, भगवान गणेश और चंद्र देव का चित्र रखें।
- पूजा की थाली सजाएं। इसमें दीपक, चावल, रोली, फूल, सिंदूर, मिठाई, चुनरी, चूड़ी आदि रखें।
- करवा (कलश) में जल भरें, यह भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है।
- दीपक जलाकर करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें।
- शाम को छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का दर्शन करें।
- पति द्वारा जल ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें। पूजा थाली में रखें ये वस्तुएं
पूजा थाली में शुभ सामग्री रखना बहुत आवश्यक माना गया है। इसमें शामिल करें, गंगाजल, शुद्ध जल, कलश, करवा, चौकी, दीपक, रुई, कपूर, फूल, कुमकुम, रोली, चावल, हल्दी, सिंदूर, मिठाई, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, चुनरी, दही, दूध, घी, गेहूं, जौ, शक्कर और दक्षिणा।
सींक का महत्व
करवा चौथ की कथा के अनुसार, करवा माता ने एक बार अपने पति के प्राण बचाने के लिए सींक से मगरमच्छ का मुंह बांध दिया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति को जीवनदान दिया। इसलिए करवा चौथ की पूजा में सींक रखना शुभ और आवश्यक माना जाता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा
करवा चौथ की संध्या को जब चांद निकलता है, तब महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का दर्शन करती हैं। यह क्षण बेहद पवित्र माना जाता है। चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। ऐसा करने से सौभाग्य, प्रेम और लंबा वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है।
कार्तिक माह का महत्व
कार्तिक मास सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इसी महीने दीपावली, धनतेरस, छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। करवा चौथ का व्रत भी इसी महीने की चतुर्थी तिथि को आता है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी विशेष निर्णय से पहले अपने पंडित या ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लें।
Keywords: Karwa Chauth 2025, Karwa Chauth 2025 Date And Time, Karwa Chauth Puja Vidhi In English, Karwa Chauth Moonrise Time 2025

