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Chhath Puja 2025: सिर्फ आस्था ही नही, सेहत के लिए भी फायदेमंद है छठ महापर्व

छठ महापर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान और मानव स्वास्थ्य का अद्भुत संगम है। यह लोकआस्था और सूर्य की ऊर्जा से जुड़ी वैज्ञानिक सच्चाइयों को भी दर्शाता है।

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उत्तर भारत, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा आज से शुरू हो गई है। लोग घाटों पर छठ मईया के गीत गाते हुए डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य देते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और जीवन में संतुलन का प्रतीक भी है। इस परंपरा में हमारे पूर्वजों ने स्वास्थ्य और आस्था को एक साथ जोड़ा। सूर्य की उपासना को जीवनशक्ति का आधार माना गया, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। छठ पूजा के दौरान लोग साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं और प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा करते हैं। व्रती फल, पानी और शुद्ध भोजन का सेवन करते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि आस्था और विज्ञान, दोनों को संतुलित करके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

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जीवन की आत्मा का दर्शन

वेदों में कहा गया है—“सूर्योऽत्मा जगतस्तस्थुषश्च”, यानी सूर्य समस्त जीवन का आधार है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि सूर्य की रोशनी शरीर में विटामिन डी बनाने का सबसे प्राकृतिक तरीका है। यह हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। छठ व्रत के दौरान व्रती बिना किसी कृत्रिम साधन के सूर्य की किरणों को ग्रहण करते हैं। इससे शरीर प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स होता है और कोशिकाओं में कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। सूर्य की ऊर्जा को सीधे ग्रहण करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है, जो छठ पूजा को सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

पौराणिक कथाएं और छठ का उद्गम

छठ पर्व की उत्पत्ति महाभारत काल तक मानी जाती है। कथा अनुसार कर्ण सूर्य देव के बड़े भक्त थे और रोज़ कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। इसी तरह, च्यवन ऋषि की पत्नी सुकन्या ने अपने वृद्ध पति को सूर्योपासना के माध्यम से पुनर्यौवन दिलाया। इसके अलावा, रामायण, विष्णु पुराण और देवीभागवत में भी सूर्य की उपासना और उसकी ऊर्जा को जीवनदायी बताने वाले कई संदर्भ मिलते हैं। ये सभी कथाएं यह दिखाती हैं कि सूर्य की पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और शक्ति के लिए भी जरूरी मानी जाती है।

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आयुर्वेदिक दृष्टि से जानिए छठ व्रत का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार सूर्य हमारे शरीर की अग्नि यानी पाचन शक्ति को नियंत्रित करता है। छठ के दौरान व्रती का उपवास और संयम इस अग्नि को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। सूर्य की रोशनी में ध्यान करने से शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन सक्रिय होते हैं, जिससे नींद बेहतर होती है, मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। इस तरह, छठ का व्रत सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक संतुलन के लिए भी फायदेमंद है। यह पर्व शरीर और मन दोनों को लाभ पहुंचाने वाला एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक रूप से भी समर्थित अभ्यास है।

विज्ञान क्या कहता है?

वैज्ञानिकों के अनुसार सुबह 6 से 8 बजे और शाम 4 से 6 बजे की धूप में मौजूद यूवी-बी किरणें शरीर के लिए सबसे फायदेमंद होती हैं। ये किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना विटामिन डी बनाने में मदद करती हैं। इसी कारण छठ पूजा में सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय की पूजा का प्रावधान है, ताकि व्रती सूर्य की प्राकृतिक ऊर्जा से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकें।

भारत में विटामिन डी की “मूक महामारी”

2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की शहरी आबादी का करीब 70% हिस्सा विटामिन डी की कमी से प्रभावित है। यह कमी हड्डियों को कमजोर करने, थकान, डिप्रेशन और इम्यूनिटी में गिरावट का कारण बनती है। ऐसे में छठ जैसे पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को संतुलित करने का प्राकृतिक और प्रभावी तरीका भी साबित होते हैं, क्योंकि व्रती सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर विटामिन डी प्राप्त करते हैं और शरीर और मन दोनों को लाभ पहुंचाते हैं।

सूर्यस्नान से हेलियोथेरेपी तक

आज पश्चिमी देश जो सनबाथ और हेलियोथेरेपी को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानते हैं, वही परंपरा भारत में सदियों से छठ पूजा के रूप में अपनाई जा रही है। घाटों पर खड़े होकर व्रती सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करते हैं, जो न केवल आध्यात्मिक अनुभव देता है बल्कि प्राकृतिक हीलिंग थेरेपी का भी काम करता है। आयुर्वेद में इसे ‘कटिस्नान’ कहा गया है, जो शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने और पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस तरह छठ पूजा में सूर्योपासना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है।

छठ पूजा सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, शरीर और आत्मा के संतुलन का पर्व है। यह दिखाता है कि हमारी परंपराओं में छिपे हर रीति-रिवाज के पीछे वैज्ञानिक और स्वास्थ्यपूर्ण आधार होता है। सूर्य की ऊर्जा, व्रत का संयम और श्रद्धा का यह मेल आज भी उतना ही महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

Keywords: Chhath Puja 2025, Helio Therapy, Health Benefits, Bihar Festival, Indian Culture

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