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कल है Gig Workers की हड़ताल, ओला-उबर और स्विगी-जोमैटो सभी सेवाएं रहेगी बंद

GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि सरकार और ऐप कंपनियों से मांग है कि काम करने वालों के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम रेट तय किया जाए, ताकि उन्हें सही मेहनताना मिले।

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Gig Workers Strike on Sunday 17 May: इस वीकेंड लोगों की सुविधा पर असर पड़ सकता है। 17 मई, रविवार को ओला-उबर से यात्रा करना मुश्किल हो सकता है। स्विगी-जोमैटो से खाना ऑर्डर करने में भी परेशानी आ सकती है। साथ ही जेप्टो और ब्लिंकिट जैसी डिलीवरी सेवाएं भी प्रभावित रह सकती हैं। इतना ही नहीं, अगर आपने अमेजन या फ्लिपकार्ट से कोई सामान मंगवाया है और डिलीवरी रविवार को तय थी, तो उसमें भी देरी हो सकती है।

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ईंधन महंगाई के विरोध में गिग वर्कर्स की हड़ताल

दरअसल, रविवार को देशभर के गिग वर्कर्स 5 घंटे की हड़ताल पर रहेंगे। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ऐप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी किराया और चार्ज बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले 4 साल बाद हुई यह बढ़ोतरी काफी ज्यादा है। इसी के विरोध में और प्रति किलोमीटर रेट बढ़ाने की मांग को लेकर यह हड़ताल की जा रही है।

5 घंटे बंद रहेंगी ऐप सेवाएं

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने बताया है कि रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक हड़ताल रहेगी। इस दौरान 5 घंटे के लिए ओला, उबर, रैपिडो, स्विगी, जोमैटो, बिस्ट्रो, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसी ऐप आधारित सेवाएं बंद रहने का ऐलान किया गया है।

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बढ़ती लागत से गिग वर्कर्स पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतें बढ़ने के बाद देश में भी ईंधन महंगा हो गया है। लंबे समय तक दाम नियंत्रित रखने के बाद अब तेल कंपनियों ने बढ़ोतरी की है, जिससे गिग वर्कर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। एलपीजी और बढ़ती लागत के कारण कई रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन बंद हो गए या उन्होंने मेन्यू सीमित कर दिया है। इसका असर फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी पड़ा है, जहां ऑर्डर में 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है।

20 रुपये प्रति किलोमीटर न्यूनतम रेट की मांग

GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने गिग वर्कर्स पर सीधा असर डाला है, जो पहले से ही महंगाई और गर्मी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेजन, स्विगी, जेप्टो और अन्य कंपनियों के डिलीवरी वर्कर्स अब बढ़ते खर्च का बोझ नहीं उठा सकते। इसलिए सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मांग है कि कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम रेट तय किया जाए।

कमाई नहीं बढ़ी तो गिग इकोनॉमी पर असर

यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर ईंधन और वाहन रखरखाव के खर्च के हिसाब से कमाई नहीं बढ़ी, तो लाखों गिग वर्कर्स इस सेक्टर को छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इससे देश की गिग इकोनॉमी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। नीति आयोग के अनुसार, इस क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद इसके तेजी से बढ़ने की संभावना है। भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2020-21 में 77 लाख थी, जो 2029-30 तक बढ़कर लगभग 2.3 करोड़ होने का अनुमान है।

Keywords: Gig Workers Strike, Ola Uber Swiggy Zomato Strike Impact, Fuel Price Hike Gig Economy India

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