नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर राज्य के नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि महाराष्ट्र सामाजिक जागरण और सुधारों की भूमि रहा है तथा आज भी देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
राष्ट्रपति ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पवित्र भूमि देशभक्ति, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने देश को अनेक महान विभूतियां दी हैं, जिन्होंने समाज और राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की।
इन महान व्यक्तित्वों में महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे नाम शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि महाराष्ट्र के परिश्रमी और संकल्पित लोग देश को आगे बढ़ाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कामना की कि राज्य निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और यहां के लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।
महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर राज्य के सभी निवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। छत्रपति शिवाजी महाराज की यह पवित्र भूमि हमें राष्ट्र-भक्ति, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा देती है। महाराष्ट्र से महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गोपालकृष्ण गोखले और…
— President of India (@rashtrapatibhvn) May 1, 2026
प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और विभिन्न क्षेत्रों में उसके योगदान की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साहित्य, रंगमंच, संगीत, सिनेमा, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान और जनसेवा जैसे क्षेत्रों में महाराष्ट्र ने देश के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने राज्य के निरंतर विकास और लोगों के कल्याण की कामना की।
महाराष्ट्र दिनानिमित्त महाराष्ट्रातील माझ्या सर्व बंधू-भगिनींना हार्दिक शुभेच्छा. सामाजिक प्रबोधन, समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा आणि विविध क्षेत्रांतील नेतृत्वाचा महाराष्ट्राला प्रदीर्घ गौरवशाली इतिहास लाभला आहे. साहित्य, नाट्य, संगीत, चित्रपट ते उद्योग, शिक्षण, विज्ञान आणि सार्वजनिक…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 1, 2026
1 मई को ही क्यों मनाया जाता है महाराष्ट्र दिवस
महाराष्ट्र दिवस हर वर्ष 1 मई को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1960 में भाषाई आधार पर तत्कालीन बंबई राज्य के विभाजन के बाद महाराष्ट्र और गुजरात के गठन की स्मृति में मनाया जाता है।
इस विभाजन के पीछे लंबे समय तक चले आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके बाद 1 मई 1960 से नया कानून लागू हुआ और महाराष्ट्र एक पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
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