महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पास न होने पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इसी को लेकर मुंबई के बालासाहेब भवन में शिवसेना कार्यकर्ताओं और महिला आघाड़ी ने कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व पर महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। इस दौरान कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी प्रदर्शन में शामिल रहे और उन्होंने अपने विरोध को जोरदार तरीके से दर्ज कराया।
समर्थन के दावे पर उठे सवाल
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर देश-विदेश की नजरें टिकी थीं, लेकिन यह विधेयक पास नहीं हो सका। विधायक डॉ. नीलम गोऱ्हे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने सिर्फ दिखावे के लिए समर्थन जताया और वोटिंग के समय पीछे हट गए। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर लोगों को गुमराह किया और अब उन्हें महिलाओं से समर्थन मांगने का हक नहीं है।
रणनीति की कमी पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा में वोटिंग से पहले सभी सहयोगी दलों के नेताओं को रणनीति में शामिल किया जाता, तो शायद बिल को पास कराने की स्थिति बन सकती थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समन्वय और ठोस योजना से ही बड़े फैसले सफल होते हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि पहले भी महिला आरक्षण को लेकर पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
महिला आरक्षण विधायक डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महिलाओं को आरक्षण नहीं दे सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से इस मुद्दे को टालने के कारण विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया। उनके मुताबिक, हालिया वोटिंग में भी विपक्ष के रुख ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के रास्ते में रुकावट डाली। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए विपक्षी नेताओं के खिलाफ नाराजगी भी व्यक्त की।पर कांग्रेस पर निशाना
Keywords: Women Reservation Bill, Nari Shakti Vandan Adhiniyam Controversy, Shiv Sena Protest

