होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को रूस से तेल खरीदने की दी गई छूट को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले संकेत दिया था कि यह राहत खत्म हो सकती है, लेकिन अब इसे करीब एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी वित्त विभाग ने इसके लिए नया लाइसेंस जारी किया है, जिससे 16 मई तक रूसी तेल से जुड़े लेनदेन और शिपमेंट जारी रह सकेंगे। यह फैसला उस बयान के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें इस छूट को आगे न बढ़ाने की बात कही गई थी।
सीमित शर्तों के साथ बढ़ाई गई अवधि
यह नई छूट पिछली राहत खत्म होने के बाद लागू की गई है और लगभग एक महीने तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सीमित शर्तों के साथ रूसी तेल की खरीद जारी रखने की अनुमति दी गई है। हालांकि इस फैसले में साफ किया गया है कि ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी तरह के तेल लेनदेन की इजाजत नहीं होगी।
छूट पर बयान के बाद उठा सियासी विवाद
अमेरिकी वित्त सचिव ने पहले स्पष्ट किया था कि रूस और ईरान से जुड़े तेल पर दी गई सामान्य छूट को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा था कि पहले जारी अनुमति का इस्तेमाल पहले ही हो चुका है और इससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ी। हालांकि, इस फैसले को लेकर अमेरिका में ही विरोध देखने को मिला, जहां कई नेताओं ने कहा कि ऐसी राहत से प्रतिबंधित देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंच सकता है।
छूट के बीच सप्लाई और कीमतों पर असर
रूस की ओर से कहा गया था कि अमेरिकी छूट मिलने से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई वैश्विक बाजार में पहुंच सकती है, जिससे अस्थायी रूप से आपूर्ति बढ़ेगी। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और आंशिक बंदी के चलते तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। यह मार्ग दुनिया के तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
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