आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में घटती जन्मदर को देखते हुए सीएम चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने ‘जनसंख्या प्रबंधन’ नीति का मसौदा जारी किया है। इस मसौदे में सरकार की नई नीति के तहत ‘पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पैकेज’ के जरिए प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। योजना के अनुसार यदि किसी परिवार में दूसरे या उससे अधिक बच्चे का जन्म होता है, तो सरकार की ओर से 25,000 रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए नायडू ने गुरुवार को विधानसभा में मसौदा नीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार इस नीति को मार्च महीने में अंतिम रूप देगी और इसे 1 अप्रैल से लागू करने की योजना है।
ये फायदे भी मिलेंगे
सीएम चंद्रबाबू नायडू की सरकार द्वारा तैयार किए गए मसौदा नीति में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत तीसरे बच्चे को 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त शिक्षा देने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही जिन दंपतियों के पास संतान नहीं है या जो और संतान चाहते हैं, उनके लिए आईवीएफ उपचार की दरों में कमी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। वहीं मां को 12 महीने का मातृत्व अवकाश और पिता को 2 महीने का पितृत्व अवकाश देने का भी प्रस्ताव है।
सीएम चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में परिवार और जनसंख्या से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि जिन सरकारी कर्मचारियों के तीन बच्चे हैं और जो सेवानिवृत्ति के करीब हैं, उन्हें 15 दिन का विशेष स्वास्थ्य अवकाश और 50,000 रुपये का स्वास्थ्य कोष दिया जाएगा।
सरकार माता-पिता की बराबर जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए “माता-पिता की समान जिम्मेदारी” नाम से एक जागरूकता अभियान भी शुरू करेगी। इसके साथ ही बाल देखभाल से जुड़े शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और तीसरे बच्चे के लिए परिवारों को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
इसके अलावा राज्य में पहले से चल रही तल्लीकी वंदनम योजना के तहत स्कूली बच्चों की माताओं को प्रति बच्चे 15,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं, सीएम चंद्रबाबू नायडू की सरकार नसबंदी प्रोत्साहन योजना को समाप्त करने पर भी विचार कर रही है।
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