शुक्रवार को जैसलमेर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट बनकर उड़ान पर निकलीं। वायुसेना की यूनिफॉर्म में उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता था। सुबह करीब 10:10 बजे उन्होंने उड़ान भरी और 25 मिनट बाद, 10:35 पर, सुरक्षित लैंडिंग कर ली। इस दौरान उन्होंने पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज और परमाणु परीक्षण स्थल का जायजा भी लिया हेलीकॉप्टर में बैठकर।
एयरफोर्स बेस पर पहुंचते ही सीनियर अफसरों ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति ने उनसे बातचीत की, जवानों के बीच कुछ वक्त बिताया। उड़ान के बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर के कैप्टन को सम्मानित किया और एक स्मृति-चिह्न भी भेंट किया।आपको बता देन, शाम को होने वाले ‘वायुशक्ति 2026’ अभ्यास में भी राष्ट्रपति मुख्य अतिथि बनेंगी, यानी इस दौरे का महत्व और बढ़ गया।
‘प्रचंड’ क्यों है खास और रणनीतिक रूप से अहम
‘प्रचंड’ भारत का अपना लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जिसे Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने बनाया है। अक्टूबर 2022 से ये भारतीय वायुसेना का हिस्सा है। इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि ये पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों और रेगिस्तान, दोनों में काम कर सकता है। राजस्थान से लेकर कश्मीर और अरुणाचल तक, इसकी तैनाती मुमकिन है। ये हेलीकॉप्टर 5,000 मीटर से ज्यादा ऊपर जाकर भी टारगेट पर हमला कर सकता है। दुनिया में सिर्फ कुछ ही हेलीकॉप्टर ऐसा कर पाते हैं। इसकी टॉप स्पीड लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा है और फ्यूल भरकर ये करीब 700 किलोमीटर तक उड़ सकता है। तीन घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है, जो इसे लंबे मिशन के लिए परफेक्ट बनाता है। इसका वजन 5.8 टन है, लंबाई 15.8 मीटर और ऊंचाई 4.7 मीटर, यानी हल्का भी, ताकतवर भी।
President Droupadi Murmu undertook a sortie in the indigenous Light Combat Helicopter Prachand at Air Force Station Jaisalmer, Rajasthan. The President said that we are extremely proud of our country's brave air warriors. She described LCH Prachand as a powerful symbol of… pic.twitter.com/AbtCgBkLWi
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 27, 2026
रणनीतिक क्षमताएं और मारक शक्ति
‘प्रचंड’ खास तौर पर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान को निशाना बनाने के लिए डिजाइन हुआ है। इसमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, रॉकेट और मशीन गन जैसे लेटेस्ट हथियार लगे हैं। दुश्मन के बंकर और ठिकानों को तबाह करने में इसकी अहम भूमिका है। HAL का तुमकुरू प्लांट हर साल करीब 30 हेलीकॉप्टर बना सकता है। जरूरत पड़ी तो ये संख्या 100 तक भी जा सकती है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बना ये हेलीकॉप्टर भारत की आत्मनिर्भरता की मिसाल है। राष्ट्रपति की उड़ान ने न सिर्फ स्वदेशी तकनीक पर भरोसा दिखाया, बल्कि ये भी बताया कि देश का सबसे बड़ा संवैधानिक पद भी फौजियों के साथ हर मोर्चे पर खड़ा है।
आज राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपना अनुभव साझा किया: ‘प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का एक प्रबल प्रतीक है। इस समय मैं प्रसिद्ध जैसलमेर किले के ऊपर उड़ान भर रही हूँ। मुझे देश के वीर वायु… pic.twitter.com/cgflLWRjtf
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 27, 2026
संदेश, प्रतीक और प्रेरणा
राष्ट्रपति का ये कदम सिर्फ एक औपचारिक उड़ान नहीं था। ये सैनिकों के मनोबल को नई ऊंचाई देने का मजबूत इशारा था। को-पायलट बनकर वे खुद ये दिखा गईं कि देश की लीडरशिप सैनिकों के जज्बे और समर्पण को पूरी तरह समझती है। जैसलमेर से दिया गया उनका संदेश सीधा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टेक्नोलॉजी की तरक्की। ‘प्रचंड’ में उड़ान ने साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता जा रहा है। ये पल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मिसाल बनेगा। जहां नेतृत्व, साहस और तकनीक, तीनों एक साथ नई ऊंचाई पर पहुंचते हैं।
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