पाकिस्तान ने हमेशा की तरह कश्मीर का राग अलापने की अपनी आदत नहीं छोड़ी है। हर बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में एक बार फिर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि उसे फिर से कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
पाकिस्तान को जवाब देते हुए भारत की डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने उसे जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान ‘ला-ला लैंड’ यानी खयाली दुनिया में जी रहा है। अनुपमा सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की कंगाली और जम्मू-कश्मीर की खुशहाली के बीच कितना बड़ा अंतर है, और उसके प्रोपेगेंडा को पूरी तरह खारिज कर दिया। यह जवाब पाकिस्तान के लिए किसी तीखी मिर्ची से कम नहीं रहा होगा।
पाकिस्तान पर कसा तंज
- भारत ने पाकिस्तान पर भ्रामक बयानबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि दुष्प्रचार से ऐतिहासिक और कानूनी सच्चाई नहीं बदली जा सकती।
- सरकार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों के तहत वैध और अंतिम रूप से हुआ था।
- भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित मुद्दा केवल उन क्षेत्रों का है, जिन पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिन्हें आमतौर पर पीओके कहा जाता है।
- भारत ने पाकिस्तान से अपने कब्जे वाले इलाकों को खाली करने की मांग दोहराई।
- साथ ही, जम्मू-कश्मीर में हालिया चुनावों में रिकॉर्ड मतदान का हवाला देते हुए कहा गया कि जनता आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को नकारते हुए लोकतंत्र और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
हमारे बजट के आगे तुम कहीं नहीं
अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर तीखा बयान देते हुए कहा कि इस्लामाबाद को शायद यह स्वीकार करना कठिन लग रहा है कि अकेले जम्मू-कश्मीर का विकास बजट उस राहत पैकेज से कहीं अधिक है, जिसके लिए वह इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) से सहायता मांग रहा है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान को दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज, चिनाब ब्रिज, काल्पनिक या फर्जी प्रतीत होता है, तो यह उसकी वास्तविकताओं से दूरी को दर्शाता है।
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